संभल हिंसा: 'हिंसा के वक्त फारूकी के घर छिपा रहा...' सपा विधायक के बेटे के बयान और जांच रिपोर्ट में फंसा बड़ा पेंच
सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल ने संभल हिंसा के दौरान फारूकी के घर में छिपे होने और हिंसा न देखने का दावा किया है। लेकिन न्यायिक जांच रिपो ...और पढ़ें

संभल हिंसा की फाइल फोटो
HighLights
बोले- किसी को नहीं भड़काया, हिंसा आंखों से नहीं देखी
संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। संभल हिंसा की न्यायिक जांच में सपा विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सुहेल इकबाल का शपथ-पत्र का बयान भी रिपोर्ट जारी होने के बाद सामने आया है। जिन्होंने आयोग के सामने 24 नवंबर 2024 को खुद को हिंसा से पूरी तरह अलग बताते हुए कहा कि वह जामा मस्जिद से करीब 100 मीटर दूर इंतजामिया कमेटी के सचिव मशहूद अली फारूकी के घर में मौजूद थे।
उनके अनुसार वह सुबह करीब छह बजे जामा मस्जिद पहुंचे और नमाज के बाद पिता के निर्देश पर फारूकी को सर्वे में सहयोग का संदेश देने उनके घर गए। फारूकी के चेहरे और होंठ पर चोट थी और उन्होंने मास्क लगा रखा था।
सुहेल के अनुसार इसी दौरान डीएम, एसपी और अधिवक्ता आयुक्त वहां पहुंचे। एक सिपाही ने उन्हें अधिकारियों के पास बुलाया, लेकिन डीएम और एसपी ने कहा कि सुहेल अंदर रहें, सर्वे शुरू होने वाला है और रास्ते बंद हैं।
इसके बाद वह फारूकी के घर में ही रहे और शाम करीब साढ़े पांच से छह बजे तक बाहर नहीं निकले। उन्होंने आगजनी, पत्थरबाजी और गोलीबारी प्रत्यक्ष देखने से इन्कार किया।
उनका कहना है कि चार लोगों की मौत, वाहनों में आगजनी, पुलिस पर पथराव और आंसू गैस की जानकारी उन्हें बाद में टीवी चैनलों और मोबाइल फोन से मिली। आयोग के सवाल पर उन्होंने लोगों को भड़काने के आरोप को पूरी तरह निराधार बताया।
इससे पहले 19 नवंबर के सर्वे में उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग करने, लोगों से क्षेत्र खाली कराने और सर्वे को कोर्ट के आदेश के तहत बताते हुए समर्थन करने की बात कही।
उन्होंने बताया कि उस दिन सांसद जियाउर्रहमान बर्क सर्वे शुरू होने के 15-20 मिनट बाद मस्जिद पहुंचे थे और केवल यह पूछा था कि क्या हो रहा है।
वहीं न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में 24 नवंबर की हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताते हुए सुहेल इकबाल, सांसद जियाउर्रहमान बर्क और इंतजामिया कमेटी से जुड़े लोगों की भूमिका पर गंभीर निष्कर्ष सामने आए हैं।
यही वजह है कि सुहेल की गवाही में खुद को घटनास्थल से अलग बताने का दावा और आयोग की रिपोर्ट में उनकी भूमिका का उल्लेख इस पूरे मामले का सबसे अहम विरोधाभास बन गया है।

