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नाबालिगों से मोबाइल चोरी करवाकर दिल्ली के फुटपाथ पर सेल... संभल पुलिस ने पकड़ा बिहार-झारखंंड का गैंग, लॉकडाउन के बाद शुरू की चोरियां

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:12 AM (GMT+05:30)Updated: Sun, 11 Oct 2026 09:24 AM (GMT+05:30)

संभल पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो झारखंड से नाबालिगों को लाकर उनसे मोबाइल चोरी करवाता ...और पढ़ें

HighLights

  1. नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराने वाला गिरोह पकड़ा गया

  2. संभल पुलिस ने 42 चोरी के मोबाइल बरामद किए

  3. चोरी के फोन दिल्ली के फुटपाथ बाजारों में बिकते थे

संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। झारखंड के रहने वाले सदस्यों का एक ऐसा गिरोह जो बिहार और झारखंड से नाबालिगों को लाकर उनसे 300 से 500 रुपये में मोबाइल चोरी करवाता है। फिर उसे दिल्ली में फुटपाथ बाजार रखकर बेच देता है। गुन्नौर पुलिस ने एक नाबालिग समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से अलग-अलग कंपनियों के 42 एंड्रायड मोबाइल और चोरी का एक आधार कार्ड मिला है। जिनकी कीमत करीब दस लाख रुपये है।  

गूगल पर तलाश करते थे बाजार

गूगल पर प्रसिद्ध बाजार तलाशते, फिर वहां पहुंचकर नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराते थे। गुन्नौर पुलिस की गिरफ्त में आए झारखंड के दिनेश कुमार मेहतो, सुरजन कुमार शाह और करन कुमार से पूछताछ में गिरोह का तरीका सामने आया है। कोरोना काल के लॉकडाउन में मजदूरी बंद होने के बाद सक्रिय हुए गिरोह के सदस्य बिहार और झारखंड के 10 से 15 वर्ष तक के नाबालिगों को काम दिलाने के बहाने लाते थे। पकड़ा गया 14 वर्षीय नाबालिग बिहार के कटिहार से लाया गया था। उसके पिता पहले सुरजन के चाचा के साथ मजदूरी कर चुके थे।

लॉकडाउन में शुरू किया गिरोह

दिनेश और सुरजन वारदात के दौरान नाबालिग के आगे-पीछे चलते थे। चोरी किया मोबाइल साथी को थमाया जाता था, जबकि करन बाजार से बाहर सड़क किनारे चोरी के मोबाइल एकत्रित करने का इंतजार करता था। तीन-चार फोन इकट्ठे होने पर सदस्य निकल जाते थे। संभल के अलावा हाथरस, कासगंज, एटा और अलीगढ़ में वारदात करने वाला गिरोह पुलिस की घेराबंदी बढ़ने पर जिला बदल देता था। कासगंज में दबिश के बाद वे अलीगढ़ से संभल आए थे।

25 हजार का फोन पांच हजार में बेचते थे

गिरोह करीब तीन महीने से अलीगढ़ में रह रहा था। चोरी के फोन दिल्ली के करोल बाग स्थित फुटपाथ बाजार में रात 12 से सुबह पांच बजे तक बेचते थे। 25 हजार रुपये का फोन करीब पांच हजार में बिकता था। खरीदार कोई आम आदमी नहीं बल्कि ऐसे लोग होते हैं जो फोन के पुर्जे दूसरे मोबाइलों में इस्तेमाल करते थे। दिनेश ने बताया कि उसका परिवार साधारण आर्थिक स्थिति वाला है और उसका भाई भी मोबाइल चोरी में शामिल है।

अब तक 500 मोबाइल चोरी के मिले सुराग

सुरजन के पिता सराफ हैं, जबकि करन करीब एक महीने पहले मजदूरी की तलाश में उनके साथ जुड़ा था। गूगल सर्च हिस्ट्री और मिले आडियो काल के आधार पर करीब 500 मोबाइल चोरी की आशंका है। गिरोह ने हाल में 1.93 लाख रुपये के मोबाइल बेचने की बात भी सामने आई है। पुलिस खरीदारों की पहचान में जुटी है।

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पुलिस ने बताया कि पहले किसी जिले में वारदात के बाद पुलिस इनके पीछे पड़ती तो यह दूसरी जनपद में भाग जाते और वहां वारदात कहते हैं। इसके बाद चोरी के फोन दिल्ली के फुटपाथ बाजारों में ग्राहकों को बेचकर रुपये कमाता था।

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