कछुए का पानी पीने से ठीक होगी TB’- अंधविश्वास में 400 रुपये का कछुआ खरीदना पड़ा भारी, दो गिरफ्तार
चंदौसी में टीबी ठीक करने के अंधविश्वास में कछुआ खरीदने और बेचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वन विभाग ने कछुए को सुरक्षित बचाकर तालाब ...और पढ़ें

चंदौसी मुहल्ला तेलियान निवसी उमेश कुमार ने खरीदा कछुआ। जागरण
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चंदौसी के तेलियान मुहल्ले का मामला, वन विभाग की टीम कर रही मामले की जांच
संवाद सहयोगी, चंदौसी (संभल)। शहर के तेलियान मुहल्ले में शनिवार की दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब वध के उद्देश्य से घर लाए गए एक कछुआ को पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बरामद किया। इस दौरान टीम ने कछुआ लाने वाले गृहस्वामी और उसे बेचने वाले युवक को हिरासत में ले लिया है। कछुआ को टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर काशीपुर स्थित तालाब में छोड़ दिया है। वहीं पूरे मामले की जांच चल रही है।
चंदौसी के तेलियान मुहल्ला निवासी एक व्यक्ति, जो शहर के एक निजी स्कूल में रिक्शा चलाता है, अपनी पत्नी के साथ लंबे समय से टीबी की बीमारी से ग्रस्त है। किसी ने उसे यह भ्रमित जानकारी दी कि कछुए के रहने वाले पानी को पीने या उसका मांस खाने से टीबी की बीमारी जड़ से ठीक हो जाती है।
इस अंधविश्वास के झांसे में आकर उसने अपने ही स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत खुर्जा गेट निवासी एक युवक से संपर्क किया और 400 रुपये में कछुआ खरीद लिया। व्यक्ति जब कछुए को अपने घर लेकर पहुंचा, तो उसकी छह वर्षीय मासूम बेटी ने अनजाने में पड़ोसियों को बता दिया कि घर में कछुआ का मांस बनाया जाएगा।
यह सुनते ही आसपास के लोग जमा हो गए और तत्काल डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस को कछुआ बाल्टी के पानी में जीवित मिला। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति पहले भी वध करने की नीयत से कछुआ लाया था, जिसे विरोध के बाद छुड़वा दिया गया था।
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हालांकि, आरोपित व्यक्ति अंधविश्वास और अपनी बीमारी का हवाला देते हुए वध करने की बात से इन्कार करता रहा। मामले की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय वन अधिकारी प्रभात कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लेते हुए कछुए को अपने कब्जे में लिया और आरोपित गृहस्वामी व कछुआ बेचने वाले युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।
युवक दो साल से पाल रहा था कछुआ
जिस युवक ने कछुआ व्यक्ति को 400 रुपये में बेचा था। उसने दावा किया कि वह दो साल से कछुए को पाल रहा है। उसे तालाब के किनारे कछुआ मिला था, जो काफी छोटा था। इस लिए वह कछुए को लेकर अपने घर आ गया और देखभाल करने लगा। तीन चार दिन पहले व्यक्ति ने अपनी बीमारी का हवाला देते हुए कछुआ मांगा था। परिचित होने की वजह से उसने कछुआ दे दिया।
कछुआ संरक्षित, नहीं पाल सकते
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कछुओं की प्रजातियों को पालना, बेचना या घर में रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। कछुआ संरक्षित श्रेणी में आते हैं और उल्लंघन करने पर 3 से 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
कछुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर काशीपुर स्थित तालाब में छोड़ दिया गया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। देर शाम तक दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी थी।
- प्रभात कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी
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