प्राइवेट विद्यालयों पर कसेगा शिकंजा, खटारा स्कूली वाहनों में दिखे बच्चे तो नपेंगे प्रबंधक-प्रधानाचार्य
संतकबीर नगर में निजी विद्यालयों के खटारा वाहनों पर कार्रवाई होगी, 'मिशन सेफ फ्यूचर' अभियान 1 से 15 जुलाई तक चलेगा। ...और पढ़ें

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HighLights
1 से 15 जुलाई तक 'मिशन सेफ फ्यूचर' अभियान चलेगा।
खटारा स्कूली वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा।
उल्लंघन पर विद्यालय मान्यता रद्द, प्रबंधक-प्रधानाचार्य पर होगी कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, संतकबीर नगर। निजी विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। पुराने खटारा वाहनों से उन्हें घर से विद्यालय ला रहे और फिर घर पहुंचा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे इन पर किसी का भय नहीं।
शासन ने बच्चों की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए एक जुलाई से 15 जुलाई तक 'मिशन सेफ फ्यूचर' अभियान प्रारंभ कर दिया है। इस अवधि में खटारा वाहनों के संचालन पर रोक लगा दिया जाएगा। संबंधित निजी विद्यालय के मान्यता निरस्त करने, प्रबंधक व प्रधानाचार्य पर कार्रवाई हो सकती है।
वर्तमान में 260 की जगह 103 स्कूली वाहन अनफिट हैं
आंकड़ों पर नजर डालने पर पाएंगे कि इस वर्ष जनवरी से अब तक 260 स्कूली वाहन अनफिट मिल चुके हैं। इसके बारे में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय ने बीएसए व डीआईओएस के माध्यम से संबंधित निजी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्या को सचेत किया गया।
वर्तमान में 260 की जगह 103 स्कूली वाहन अनफिट हैं। एक जुलाई से 15 जुलाई तक चलने वाले 'मिशन सेफ फ्यूचर' अभियान में इसे शून्य करने का लक्ष्य है। किसी भी निजी विद्यालय में एक भी खटारा वाहन नहीं रहेंगे। इन वाहनों से स्कूली बच्चों का लाना और फिर उन्हें घर पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाएगा।
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शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता निरस्त की जा सकती है। उनके प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। एआरटीओ कार्यालय के अधिकारी,कर्मचारी इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में जुट गए हैं। ऐसा करके स्कूली बच्चों की जिंदगी सुरक्षित करेंगे।
15 दिन तक चलने वाले 'मिशन सेफ फ्यूचर' अभियान में 103 अनफिट वाहनों को शून्य करने का लक्ष्य है। किसी भी निजी विद्यालय में एक भी खटारा वाहन नहीं रहेंगे। इन वाहनों से स्कूली बच्चों का लाना और फिर उन्हें घर पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाएगा। शासन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता निरस्त की जा सकती है। उनके प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रियंवदा सिंह, एआरटीओ