कम लागत में ज्यादा मुनाफे के लिए संतकबीरनगर के किसान ने अपना नया फॉर्मूला, एक ही खेत में लगाई मक्का और अरहर की फसल
संतकबीरनगर के किसान चंद्रजीत यादव ने कृषि वैज्ञानिक की सलाह पर पहली बार एक ही खेत में मक्का और अरहर की सह-फसली खेती शुरू की है। ...और पढ़ें

हैंसर बाजार ब्लाक के चपरापूर्वी गांव के प्रगतिशील किसान चंद्रजीत यादव(बीच में)के साथ उनके फसल को देखने पहुंचे कृषि वैज्ञानिक डा. देवेश कुमार
HighLights
किसान चंद्रजीत यादव ने मक्का-अरहर की सह-फसली खेती शुरू की।
इस विधि से खेती की लागत 15-20% कम हो जाती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने इस प्रयोग की सराहना की।
दिलीप पाण्डेय, संतकबीरनगर। हैंसर बाजार ब्लॉक के चपरापूर्वी गांव के प्रगतिशील किसान चंद्रजीत यादव कृषि विज्ञान केंद्र-बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार की सलाह पर पहली बार एक ही खेत में मक्का के साथ अरहर की खेती कर रहे हैं।
करीब एक एकड़ में इस तरह खेती कर रहे हैं। अलग-अलग खेत में इसकी खेती करने पर लागत अधिक आती है। जबकि एक साथ करने पर लागत घट जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। वह ऐसी खेती करने वाले जनपद के पहले किसान बन गए हैं। यह प्रयोग भविष्य में जनपद के अन्य किसानों को प्रेरित कर सकता है और उनके लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है।
अलग-अलग मक्का व अरहर की खेती करने पर इतनी लागत
चंद्रजीत यादव ने कहा कि मक्का की खेती भूमि की तैयारी से लेकर कटाई तक में करीब 21 हजार से 33 हजार प्रति एकड़ लागत आती है। मशीन का प्रयोग करने पर लागत करीब 20 हजार से 28 हजार प्रति एकड़ आती है। वहीं अरहर की खेती में करीब 15 हजार से 27 हजार प्रति एकड़ लागत आती है।
जबकि एक ही खेत में मक्का व अरहर की एक साथ खेती करने पर प्रति एकड़ लागत करीब 30 हजार रुपये आती है। इससे करीब 15 से 20 प्रतिशत लागत घट जाती है। किसान को अच्छा मुनाफा मिल जाता है।
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फसल की जांच करने पहुंचे कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र-बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार गत बुधवार को जांच करने इस किसान के खेत में पहुंचे। उन्हें वैज्ञानिक व संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में बताया। खरपतवार पर नियंत्रण,जल प्रबंधन तथा कीट एवं रोगों से फसल को बचाने के लिए नियमित निगरानी करने को कहे।
उन्होंने कहा कि मक्का व अरहर की खेती एक साथ करने पर भूमि का बेहतर उपयोग होता है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है। उत्पादन जोखिम कम होता है। अरहर से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होती है।
इसके लिए जल्द तिथि तय करके कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों संग बैठक की जाएगी। एक ही खेत में मक्का के साथ अरहर की खेती करने पर मिलने वाले फायदे के बारे में बताया जाएगा। जिससे जनपद के अन्य किसान भी प्रेरित होकर ऐसी खेती करें और अच्छा मुनाफा कमाएं।
डॉ.सीपीएन गौतम-वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बगही के अध्यक्ष