संतकबीर नगर औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीडा की बड़ी कार्रवाई, 80 निष्क्रिय भूखंडों का आवंटन होगा रद
संतकबीरनगर के औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से निष्क्रिय पड़े 80 औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को यूपीसीडा ने अंतिम नोटिस जारी किया है। जिलाधिकारी के निर ...और पढ़ें

यूपीसीडा।
HighLights
यूपीसीडा ने 80 आवंटियों को अंतिम नोटिस जारी किया।
निष्क्रिय भूखंड रद्द कर नए निवेशकों को आवंटित होंगे।
डीएम के हस्तक्षेप से औद्योगिक क्षेत्र के पुनरुद्धार को गति।
एसके सिंह, संतकबीरनगर। औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से पसरी वीरानी अब खत्म होने की उम्मीद जगी है। प्लाट आवंटित कराने के बाद उद्योग स्थापित न करने वाले उद्यमियों पर आखिरकार उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वर्षों तक नोटिस जारी करने के बावजूद कार्रवाई से बचते रहे विभाग ने अब 80 आवंटियों को अंतिम नोटिस थमा दिया है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद इनके प्लाटों का आवंटन निरस्त कर नए निवेशकों को देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
वर्ष 1974 में यह औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था। उस समय उम्मीद थी कि यहां बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन पांच दशक बीतने के बाद भी यह सपना अधूरा है। वर्ष 1998 में संतकबीरनगर जिला बनने के बाद औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की उम्मीदें भी जगीं, लेकिन न तो यूपीसीडा ने गंभीर पहल की और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में अपेक्षित रुचि दिखाई।
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मचंद्र के अनुसार 231.34 हेक्टेयर में फैले औद्योगिक क्षेत्र में कुल 363 प्लाट विकसित किए गए। दस प्लाट विवादित हैं। इनका मामला न्यायालय में लंबित है। शेष 353 प्लाटों पर 287 उद्योग स्थापित होने थे, लेकिन वर्तमान में केवल 152 इकाइयां ही संचालित हैं। करीब 126 आवंटी वर्षों से उद्योग स्थापित किए बिना प्लाट पर कब्जा किए बैठे हैं।
इनमें 80 ऐसे आवंटी हैं जिन्होंने या तो स्वीकृत परियोजना के विपरीत गतिविधियां शुरू कर दी हैं अथवा केवल चारदीवारी बनाकर प्लाट छोड़ रखा है। यूपीसीडा ने पूर्व में भी कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन अधिकांश आवंटियों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब अंतिम नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित अवधि के भीतर उद्योग स्थापित न करने वालों का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
डीएम की सख्ती के बाद हरकत में आया विभाग
मई में औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में खाली पड़े प्लाटों का मामला जिलाधिकारी आलोक कुमार के संज्ञान में पहुंचा। उन्होंने यूपीसीडा के अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा और कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद 15 जून से 15 जुलाई के बीच निष्क्रिय आवंटियों को नोटिस जारी कर आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। प्रशासन का कहना है कि खाली होने वाले प्लाट नए निवेशकों को दिए जाएंगे, जिससे जिले में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
जमीन के बढ़े दाम तो प्लाट बने कमाई का जरिया
फोरलेन बनने के बाद औद्योगिक क्षेत्र की जमीनों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई। इसका फायदा कुछ आवंटियों ने उद्योग लगाने के बजाय प्लाटों की खरीद-फरोख्त कर उठाया। कई मामलों में प्लाट एक-दूसरे को बेचकर मोटी रकम वसूली गई। नियमों की जटिलताओं के कारण यूपीसीडा इस प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा सका।
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उद्योगों की जगह गोदाम और स्कूल
औद्योगिक क्षेत्र में गैर-प्रदूषणकारी, कृषि आधारित और स्थानीय कच्चे माल पर आधारित लघु एवं मध्यम उद्योग स्थापित होने थे, लेकिन कई प्लाटों पर गोदाम बनाकर किराये पर दे दिए गए हैं। एक प्लाट पर स्कूल भी संचालित किया जा रहा है। अब परियोजना के विपरीत उपयोग वाले ऐसे प्लाटों का आवंटन निरस्त करने की तैयारी है, जिसके बाद संबंधित आवंटी अपने प्लाट बचाने के प्रयास में जुट गए हैं।
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खाली पड़े प्लाटों और परियोजना के विपरीत उपयोग की जानकारी विभाग को समय-समय पर दी जाती रही, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उद्योग लगाने के इच्छुक लोग जमीन की तलाश में आते हैं और प्लाट उपलब्ध न होने पर लौट जाते हैं। -राम मिलन सिंह, सुपरवाइजर, यूपीसीडा
हमारी हींग निर्माण इकाई चल रही है, लेकिन प्लाट नीचा होने के कारण बरसात में पानी भर जाता है। चार महीने उत्पादन बंद रखना पड़ता है। बाजार में मांग होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। -देवव्रत तिवारी, उद्यमी
औद्योगिक क्षेत्र में प्लाट लेकर उद्योग स्थापित न करने वाले आवंटियों का आवंटन निरस्त कराया जाएगा। यूपीसीडा को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। रिक्त होने वाले प्लाट नए निवेशकों को दिए जाएंगे, जिससे जिले में औद्योगीकरण को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। -आलोक कुमार, जिलाधिकारी