आखिर क्यों कानूनी चक्रव्यूह में फंसते चले गए राजपाल यादव? जानें 5 करोड़ की उस फिल्म की पूरी कहानी
अभिनेता राजपाल यादव 16 साल पहले फिल्म बनाने के लिए लिए गए 5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। उन्होंने इसे निवेश माना था ...और पढ़ें

राजपाल यादव
HighLights
उधार ली गई रकम को निवेश मानकर फिल्म में लगाई, तकादा होने पर कमजोर पड़ा पक्ष
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। 16 वर्ष पूर्व फिल्म बनाने के लिए फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने पांच करोड़ रुपये तो ले लिए, लेकिन नियम व शर्तों को पढ़ने में चूक गए। यही गलती उन पर भारी पड़ गई। जिस रकम को निवेश मानकर चल रहे थे, वह उन्हें उधार में दी गई थी। फिल्म बनी, लेकिन बाक्स आफिस पर दर्शक नहीं जुटा सकी। कंपनी ने रकम वापस मांगी तो राजपाल ने घाटे का हवाला दिया जिस पर कंपनी ने दिल्ली के कड़कड़डूमा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
बताया कि राजपाल ने सात चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए। न्यायालय ने छह माह की सजा सुना दी। उस समय जमानत पर रिहाई मिल गई, लेकिन मुकदमे का निपटारा न हो सका। कानूनी पक्ष कमजोर पर पड़ने पर राजपाल की दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज हो गई और उन्हें तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प खुला है, जिस पर परिवार निर्णय ले सकता है।
अप्रैल 2010 में शहर के उद्यमी माधौगोपाल अग्रवाल की दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर सात चेक बाउंस की प्राथमिकी प्रीत विहार थाने में दर्ज कराई गई थी। जिसमें बताया गया कि राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे। फिल्म रिलीज हो गई, लेकिन राजपाल ने उधार नहीं चुकाया। जो सात चेक दिए थे वे भी बाउंस हो गए।
जबकि राजपाल यादव का कहना था कि माधौगोपाल ने यह रुपये निवेश के लिए लगाए थे, बाद में इसे उधार बताकर वापस मांगने लगे। उन्होंने भी भरोसा करते हुए कागजों को सही से नहीं पढ़ा था, लेकिन राजपाल के कागजों पर किए गए साइन व बाउंस चेक के आगे राजपाल के अधिवक्ता की दलीलें कमजोर पड़ गईं।
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24 अप्रैल 2018 को कड़कड़डूमा न्यायालय ने राजपाल यादव को छह माह की जेल की सजा सुनाई थी। उस समय उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी गई थी। अभिनेता को आदेश दिए गए थे कि उधार ली रकम के साथ ही प्रति चेक 1.6 करोड़ रुपये हर्जाना के तौर पर शिकायतकर्ता को देंगे, लेकिन वह तय समय पर रुपये वापस नहीं कर सके।
जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चार फरवरी तक न्यायालय में हाजिर होने के आदेश दिए थे, लेकिन राजपाल वहां भी समय से नहीं पहुंच सके, जिसको लेकर उनके अधिवक्ता की ओर से आत्मसमर्पण के आदेश को निरस्त करने के लिए तर्क दिए गए। बताया कि राजपाल रुपयों की व्यवस्था कर रहे थे, लेकिन न्यायमूर्ति ने उन्हें राहत देने से इन्कार कर दिया।