करोड़ों की जमीन, मुंबई में घर... इतनी संपत्ति, फिर भी 5 करोड़ के केस में क्यों घिरे राजपाल यादव? भाई ने खोला राज
अभिनेता राजपाल यादव को 5 करोड़ रुपये के लेनदेन विवाद में जेल हुई है, जबकि उनके पास करोड़ों की संपत्ति है। ...और पढ़ें

राजपाल यादव
HighLights
राजपाल यादव को 5 करोड़ के विवाद में जेल हुई।
करोड़ों की संपत्ति के मालिक, शहर में 9 करोड़ की जमीन।
भाई ने कहा, यह निवेश था, राजपाल को फंसाया गया।
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। पांच करोड़ रुपये के लेनदेन के विवाद में जेल गए अभिनेता राजपाल करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। 27 वर्ष के फिल्मी करियर में उन्होंने गांव में मकान, शहर में जमीन व मुंबई में घर आदि कीमती संपत्तियां बनाईं। उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है, इसके बावजूद कानूनी कार्रवाई का पटाक्षेप नहीं हो सका।
इस पर शुक्रवार को उनके भाई ने श्रीपाल यादव ने तर्क दिए कि यदि रुपये उधार लिए होते तो अब तक लौटा चुके होते। मुरली प्रोजेक्टस प्राइवेट लिमिटेड से गलत तरीके से फंसाया। कंपनी ने उधारी नहीं दी बल्कि निवेश किया था।
गांव कुंडरा से निकलकर मुंबई का रुख करने के बाद राजपाल यादव को काम मिलना शुरू हुआ तो उन्होंने माता-पिता के लिए पैतृक मकान को बेहतर तरीके से बनवाया। इस अवधि में उन्होंने गांव व कस्बे में कुछ संपत्तियां खरीदीं हालांकि, इनमें अधिकतर पारिवारिक सदस्यों के नाम पर हैं।
शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में पिता के नाम पर भूमि खरीदी, अकेले इसका ही वर्तमान मूल्य नौ करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है। उन्होंने मुंबई में भी घर लिया, अन्य निवेश भी किए। कई उतार चढ़ाव के बावजूद उन्हें फिल्मों में काम मिल रहा है। इसके बावजूद कानूनी कार्रवाई में फंसे राजपाल पूर्व में तर्क देते रहे हैं।
खबरें और भी
दरअसल, अप्रैल 2010 को शहर के उद्यमी माधौगोपाल अग्रवाल की दिल्ली के लक्ष्मीनगर स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर सात चेक बाउंस की प्राथमिकी प्रीत विहार थाने में दर्ज कराई गई थी। जिसमें बताया गया कि राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे।
फिल्म रिलीज होने के बाद उधारी चुकता नहीं की। जो सात अग्रिम चेक दिए थे, वे भी बाउंस हो गए। इस पर राजपाल यादव का कहना था कि उन्होंने माधौगोपाल अग्रवाल ने रुपये निवेश किए थे, बाद में इसे उधार बताकर वापस मांगने लगे। उन्होंने भी भरोसा करते हुए कागजों को सही से नहीं पढ़ा था।
2018 में सुनाई थी सजा
24 अप्रैल 2018 को कड़कड़डूमा न्यायालय ने राजपाल यादव को छह माह की जेल की सजा सुनाई थी। उस समय उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी गई थी। उनको आदेश दिए गए थे कि उधार ली रकम के साथ ही प्रति चेक 1.6 करोड़ रुपये हर्जाना के तौर पर शिकायतकर्ता को देंगे, लेकिन वह तय समय पर रुपये वापस नहीं कर सके।
जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चार फरवरी 2026 तक न्यायालय में हाजिर होने के आदेश दिए थे, लेकिन राजपाल वहां भी समय से नहीं पहुंच सके। उनके अधिवक्ता ने बताया कि राजपाल रुपयों की व्यवस्था कर रहे थे। अब उनको एक बार फिर से सजा सुनाई गई है।
भाई बोले - राजपाल की नीयत में खोट नहीं
शुक्रवार को बड़े भाई श्रीपाल यादव ने कहा कि राजपाल यादव की नीयत में खोट नहीं है। राजपाल व पूरे परिवार ने मेहनत के बूते खुद को खड़ा किया है। गांव में लोगो की मदद की। कई परिचितों के लिए आज भी रात दिन तन, मन, धन से साथ खड़े रहते हैं।
परिवार के सभी लोग मिलकर इस रकम को चुका सकते हैं, लेकिन राजपाल को बेवजह फंसाया जा रहा। गलत के सामने झुकने की बजाय इसका सामना करेंगे। उन्होंने बताया कि राजपाल यादव से बात हुई है। वह इस आदेश को लेकर अपील दायर करने पर विचार कर रहे हैं। पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है।