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    'राजपाल यादव की नीयत में खोट नहीं...' ₹9 करोड़ के विवाद और जेल की सजा पर परिवार ने तोड़ी चुप्पी, किया बड़ा दावा

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 12:15 AM (IST)

    अभिनेता राजपाल यादव के 9 करोड़ रुपये के विवाद और जेल की सजा पर उनके परिवार ने चुप्पी तोड़ी है। परिवार का कहना है कि राजपाल को गलत फंसाया जा रहा है और ...और पढ़ें

    राजपाल यादव

    राजपाल यादव

    HighLights

    1. 27 वर्ष के फिल्मी करियर के दौरान गांव व शहर में बनाई संपत्ति, मुंबई में भी निवेश

    जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। नौ करोड़ की रकम अभिनेता राजपाल यादव के लिए मायने नहीं रखती। फिल्मी दुनिया में 27 वर्ष के करियर के दाैरान उन्होंने अभिनय करके इससे कई गुणा अधिक रुपये कमाए।परिवार के सदस्यों की आर्थिक स्थिति भी ठीक ठाक है। ऐसे में राजपाल चाहते तो पहली ही बार में पांच करोड़ रुपये देकर विवाद निपटा सकते थे, लेकिन उन्होंने मुरली प्रोजेक्टस प्राइवेट लिमिटेड पर गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाते हुए हर बार यही दोहराया कि रकम निवेश की गई थी, उधार नहीं ली।

    इसलिए सच सामने लाने के लिए वह इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे। बंडा के छोटे से गांव कुंडरा से निकलकर मुंबई का रुख करने के बाद राजपाल यादव को काम मिलना शुरू हुआ तो उन्होंने गांव में ही अपने पैतृक मकान को और बेहतर तरीके से बनवाया। ताकि माता पिता व परिवार अच्छे से रह सकें। गांव के कई जरूरतमंदों के घरों की मरम्मत से लेकर आर्थिक मदद भी की।

    इस अवधि में उन्होंने गांव व कस्बे में कुछ संपत्तियां खरीदीं। हालांकि इनमें से अधिकांश उनके पारिवारिक सदस्यों के नाम पर हैं। शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में पिता के नाम पर भूमि खरीदी, अकेले इसका ही वर्तमान मूल्य नौ करोड़ से अधिक है। मुंबई में भी उन्होंने निवेश किए हैं। तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद उन्हें फिल्मों में लगातार काम मिल रहा है।

    ऐसे में देखा जाए तो राजपाल यादव के लिए यह रकम चुकाना कोई मुश्किल नहीं है, लेकिन उनका बार-बार कहना है कि गलत फंसाया जा रहा है। उन्होंने रकम निवेश के तौर पर ली थी, लेकिन कंपनी ने कागजों में उधार लिखा था। भरोसे पर उन्होंने बिना कागज पढ़े साइन कर दिए। इसके बाद कुछ अन्य मनमुटाव हुए तो इन कागजों को ही उनके विरुद्ध कार्रवाई का आधार बना लिया गया।

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    यह है पूरा मामला

    अप्रैल 2010 में शहर के उद्यमी माधौगोपाल अग्रवाल की दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर सात चेक बाउंस की प्राथमिकी प्रीत विहार थाने में दर्ज कराई गई थी। जिसमें बताया गया कि राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये उधार लिए थे।

    फिल्म रिलीज होने के बाद राजपाल ने उधार नहीं चुकाय। जो सात अग्रिम चेक दिए थे वे भी बाउंस हो गए। जबकि राजपाल यादव का कहना था कि उन्होंने माधौगोपाल अग्रवाल ने यह रुपये निवेश के लिए लगाए थे, बाद में इसे उधार बताकर वापस मांगने लगे। उन्होंने भी भरोसा करते हुए कागजों को सही से नहीं पढ़ा था।

    2018 में सुनाई थी सजा

    24 अप्रैल 2018 को कड़कड़डूमा न्यायालय ने राजपाल यादव को छह माह की जेल की सजा सुनाई थी। उस समय उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी दे दी गई थी। उनको आदेश दिए गए थे कि उधार ली रकम के साथ ही प्रति चेक 1.6 करोड़ रुपये हर्जाना के तौर पर शिकायतकर्ता को देंगे, लेकिन वह तय समय पर रुपये वापस नहीं कर सके।

    जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने चार फरवरी 2026 तक न्यायालय में हाजिर होने के आदेश दिए थे, लेकिन राजपाल वहां भी समय से नहीं पहुंच सके। उनके अधिवक्ता ने बताया कि राजपाल रुपयों की व्यवस्था कर रहे थे। अब उनको एक बार फिर से सजा सुनाई गई है।

    बोले भाई - राजपाल की नीयत में खोट नहीं

    राजपाल यादव के बड़े भाई श्रीपाल यादव ने कहा कि उनके भाई की नीयत में खोट नहीं है। राजपाल व पूरे परिवार ने जो कुछ भी कमाया है मेहनत के दम बनाया है। गांव में तमाम लोगो की मदद की। तमाम परिचितों के लिए आज भी रात दिन तन, मन, धन से साथ खड़े रहते हैं।

    परिवार के सभी लोग मिलकर इस रकम को चुका सकते हैं, लेकिन यहां पर राजपाल को फंसाया जा रहा है। इसलिए वे लोग गलत के सामने झुकने की बजाय इसका सामना करेंगे। उन्होंने बताया कि राजपाल यादव से बात हुई है। वह इस आदेश को लेकर अपील दायर करने पर विचार कर रहे हैं। पूरा परिवार उनके साथ खड़ा है।

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