UP के दो जिलों में एक हजार ई-रिक्शा चलते-चलते अचानक लाॅक, सर्विस सेंटरों और दुकानों के चक्कर लगा रहे चालक
शामली और बिजनौर में लगभग एक हजार ई-रिक्शा लॉक हो गए, जिससे चालकों का रोजगार प्रभावित हुआ। ...और पढ़ें

शामली के दिल्ली रोड पर बंद होने के बाद ई-रिक्शा को लेकर खड़े चालक। जागरण
HighLights
चालकों का रोजगार हो रहा प्रभावित।
अनलॉक कराने में करना पड़ा खर्च।
आकाश शर्मा, शामली। तकनीक जहां आम लोगों की सुविधा बढ़ाती है, वहीं उसके दुरुपयोग से परेशानी भी खड़ी हो सकती है। शामली और बिजनौर जिले में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां बैट्री मैनेजमेंट सिस्टम (बैट-बीएमएस) एप के जरिए तीन दिन में दोनों जिलों में लगभग एक हजार ई-रिक्शा लाॅक कर दिए गए।
इससे चालक परेशान हैं और उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है। चालकों को लाॅक खुलवाने के लिए कंपनी के सर्विस सेंटर या दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मामलों में इसको लेकर विवाद की स्थिति भी बनी है।
सोमवार सुबह से शुरू हुई इस समस्या के चलते शहर के प्रमुख चौराहों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बंद खड़े नजर आए। चालकों का कहना है कि अचानक से करंट सप्लाई बंद हो जा रही है। पता चला है कि मोबाइल एप के माध्यम से कोई ये हरकत कर रहा है।
चालक राजीव कुमार, सोनू कुमार और राहुल शर्मा ने बताया कि सवारी लेकर जाते समय अचानक रिक्शा बंद हो गया, जबकि बैट्री पूरी तरह चार्ज थी। इसके बाद उन्हें रिक्शा खींचकर दुकान तक ले जाना पड़ा, जहां लाक खोलने के लिए 100 से 200 रुपये तक खर्च करने पड़े। चालकों का दावा है कि तीन दिन में 800 से अधिक ई-रिक्शा इस तरह लाॅक किए जा चुके हैं।
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दरअसल, बैट-बीएमएस एक बैट्री मैनेजमेंट एप्लीकेशन है, जिसे चायनीज कंपनी ने बनाया है। इसे लिथियम आयन बैट्री की सेहत की निगरानी और उन्हें कंट्रोल करने के लिए बनाया गया है। इससे बैट्री का तापमान, चार्जिंग स्तर, वोल्टेज और संभावित खराबी की जानकारी मिलती है।
यह हैकिंग टूल या प्रैंक एप नहीं है। एप को चालू करते ही 10 से 15 मीटर के दायरे में ब्लूटुथ इनबिल्ड बैट्री को स्कैन कर लेता है। एप के जरिये डिस्चार्ज स्विच को आफ करते ही करंट की सप्लाई रुक जाती है। शरारती तत्व बिना पासवर्ड वाली बैट्रियों को निशाना बना रहे हैं। पासवर्ड प्रोटेक्टेड बैट्रियों को तब तक नहीं बंद किया जा सकेगा जब तक संबंधित को उसका पासवर्ड न पता हो।
तकनीकी विशेषज्ञ सक्षम मलिक के अनुसार, अधिकांश ई-रिक्शा में सस्ती चायनीज लिथियम बैट्री लगी होती है। जिसमें या तो डिफाल्ट पासवर्ड होता है या तो बेहद सरल जिसे शरारती तत्व आसानी से एप के जरिए रिक्शा लाॅक कर देते हैं। उन्होंने बताया कि इसका स्थायी समाधान यह है कि सभी ई-रिक्शा चालक सर्विस सेंटर या फैक्ट्री आउटलेट पर जाकर बैट्री का ब्लूटूथ पासवर्ड तुरंत बदलवा लें। मजबूत पासवर्ड बनाने के बाद कोई बाहरी व्यक्ति ई-रिक्शा को लाॅक नहीं कर सकेगा।
बिजनौर में भी ई-रिक्शा हुए लाॅक
बिजनौर में बुधवार देर शाम से गुरुवार तक जिला मुख्यालय के साथ ही नगीना, नजीबाबाद, किरतपुर समेत पूरे जिले में सैकड़ों की संख्या में ई-रिक्शा चलते-चलते अचानक लाॅक हो गए। बुधवार शाम नगीना में ई-रिक्शा चालकों ने दो किशोरों को पकड़ लिया, उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने मोबाइल फोन में अपलोड किए गए एप के माध्यम से ई-रिक्शा को बंद कर दिया।
बाद में उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया। सीओ राजेश सोलंकी ने बताया कि कंपनी ई-रिक्शा के कोड बदल रही है। तब तक सभी चालक अपने मोबाइल फोन में बैट-बीएमएस एप अपलोड रखें। बैट्री बंद होने की स्थिति में एप के माध्यम से उसे आन कर लें।