Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    एक गलती और 8 साल की जंग: आधार में 'महिला' से 'पुरुष' हुई फातमा, जेंडर साबित करने के लिए कराएगी मेडिकल परीक्षण

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 07:03 AM (IST)

    शामली की एक युवती आठ साल से अपने आधार कार्ड में लिंग (जेंडर) की गलती सुधारने के लिए संघर्ष कर रही है, जहां उसे महिला की जगह पुरुष दर्ज कर दिया गया था। ...और पढ़ें

    फातमा का आधार कार्ड जिममें जेंडर के कॉलम में पुरूष अंकित है

    फातमा का आधार कार्ड जिममें जेंडर के कॉलम में पुरूष अंकित है

    HighLights

    1. फातमा आठ साल से आधार जेंडर त्रुटि सुधारने को संघर्षरत।

    2. ऑपरेटर की गलती से आधार में महिला की जगह पुरुष दर्ज।

    3. सीएमओ ने पहचान पुष्टि के लिए मेडिकल परीक्षण का आदेश दिया।

    दिनेश गहलोत, शामली। व्यवस्था की एक छोटी-सी लापरवाही किसी को सालों तक उलझा सकती है। इसका जीता-जागता उदाहरण जिले में सामने आया है। 24 वर्षीय युवती आठ साल से अपने ही अस्तित्व और पहचान को साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है।

    आठ वर्ष पूर्व आधार कार्ड में संशोधन कराते समय ऑपरेटर की गलती से उसके लिंग (जेंडर) वाले कॉलम में महिला की जगह पुरुष दर्ज कर दिया गया था। इसके बाद से युवती जिले से लेकर जोन (सहारनपुर) और दिल्ली तक भाग-दौड़ कर चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

    परेशान होने के बाद वह सीएमओ कार्यालय पहुंची, जिसके बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुष्टि की जाएगी कि वह महिला है। इसके बाद आधार में संशोधन होगा।

    शामली के गांव बलवा निवासी फातमा पुत्री तय्यब ने बताया कि आधार कार्ड में जन्म तिथि गलत अंकित होने पर पहली बार 10 जनवरी 2015 को संशोधन के लिए आवेदन किया था, तब जन्मतिथि तो सही हो गई थी। हालांकि आधार कार्ड में महिला की जगह पुरुष अंकित हो गया था। उसने बताया कि इस पर ध्यान नहीं दिया था।

    खबरें और भी

    तीन साल बाद किसी कार्य में आधार कार्ड की आवश्यकता पड़ी, तब देखा कि महिला की जगह पुरुष लिखा हुआ है। इसके बाद उसने 31 जुलाई 2018 में फिर से आवेदन किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। जनसेवा केंद्र संचालक ने कहा कि आधार कार्ड में एक त्रुटि के लिए सिर्फ एक बार ही संशोधन हो सकता है। इसके बाद वह 2022 में शामली की बैंक आफ बड़ौदा की शाखा में आधार कार्ड हेल्प डेस्क पर आवेदन के लिए गई थीं।

    यहां भी उसे यह कह कर लौटा दिया गया कि आपका जेंडर एक बार बदल चुका है, इसलिए त्रुटि सुधार की लिमिट समाप्त हो गई है। वह मायूस होकर घर चली गई थी। फातमा ने बताया कि मार्च 2026 में फिर से उसने प्रयास किया और गांव खंद्रावली के जन सेवा केंद्र में आवेदन के लिए गई थी। यहां पर उससे रुपये तो ले लिए गए, लेकिन कार्य नहीं हुआ। इसके बाद वह आधार कार्ड के जिला मुख्यालय पर गई और शिकायत दर्ज कराई। यहां पर भी उसे मना कर दिया गया।

    जून 2026 में वह सहारनपुर स्थित जोनल कार्यालय गई और 150 रुपये की फीस जमा कर आवेदन किया। तब उसे 22 दिन का समय दिया गया था, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद फातमा 25 जून 2026 को दिल्ली स्थित आधार मुख्यालय अक्षरधाम पर पहुंची और 250 रुपये की फीस जमा कर आवेदन किया। यहां से भी संशोधन नहीं हुआ।

    तीन दिन पहले वह जिला आधार कार्ड मुख्यालय पर पहुंची और शिकायत की। उसे बताया गया कि सीएमओ द्वारा प्रमाणित मेडिकल परीक्षण प्रमाण पत्र के आधार पर यह संशोधन हो सकता है।

    सीएमओ से मिली, जांच के लिए भेजा

    फातमा ने बताया कि गुरुवार को वह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण गोपाल से मिली थीं। उन्होंने उसे ऊन सीएचसी में महिला चिकित्सक के पास परीक्षण कराने के लिए भेज दिया था, लेकिन महिला चिकित्सक ने उसे सीएचसी शामली पर तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज मेरठ अथवा किसी हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।

    शुक्रवार को फातमा शामली सीएचसी पर तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सक डॉ. विजेंद्र कुमार के पास पहुंची तो उन्होंने उसे शनिवार को अपने माता-पिता को साथ लेकर मेडिकल परीक्षण कराने के लिए बुलाया है।

    यह भी पढ़ें- शामली के 10वीं के छात्र ने बनाया कमाल का App, घर के कचरे से उपयोगी सामान बनाना सिखाएगा 'जुगाड़िफाई'

    खाता नहीं खुला तो रुकी छात्रवृत्ति

    फातमा ने बताया कि इसी साल उसने आईटीआई की है। त्रुटि के कारण बैंक खाता नहीं खुल सका। इसी वजह से उसे आईटीआई की छात्रवृत्ति से भी वंचित होना पड़ा है। उसने मार्केटिंग में डिप्लोमा भी किया। आधार कार्ड में जेंडर की गलती होने के कारण रोजगार के अवसर भी नहीं मिल सके। उसने बताया कि वह लगातार संशोधन के लिए यहां से वहां घूम रही है, लेकिन आठ साल बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

    आधार कार्ड में लिंग (जेंडर) में केवल एक बार ही संशोधन हो सकता है। पूर्व में एक बार हो चुका है, इसलिए लिमिट पूरी हो गई है। इस कारण अब केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जारी मेडिकल परीक्षण प्रमाण पत्र में लिंग (जेंडर) की प्रमाणिकता के आधार पर ही संशोधन संभव है।

                                                     नदीम अहमद, ऑपरेशन मैनेजर, जिला कार्यालय आधार सेंटर