स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, 1.06 लाख रुपये का जुर्माना
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर बीमा क्लेम रोकने और सेवा में कमी के लिए ₹1.06 लाख का जुर्माना लगाया।

जागरण संवाददाता, शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इलाज का क्लेम बिना किसी ठोस आधार के लटकाने पर स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी पर एक लाख छह हजार 923 रुपये का जुर्माना लगाया। इसमें मूल क्लेम, ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति, वाद व्यय और राजकोष का अर्थदंड शामिल किया है।
गांव कुड़ाना निवासी सिद्धार्थ मलिक ने 12 अक्टूबर 2023 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया था। उपभोक्ता ने इसमें अवगत कराया कि उसने अपनी पारिवारिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से पालिसी ले रखी थी। मई 2023 में उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
उन्होंने जब कैश लेस सुविधा के लिए कंपनी से संपर्क किया, तो अधिकारियों ने इलाज के बाद बिल लगाकर पूरा पैसा एक साथ रिफंड मिलने की बात कही। बताया कि उसने जेब से अस्पताल के सभी मूल बिल, दवाइयों का खर्च उठाया और नियमानुसार सभी दस्तावेज कंपनी के पास जमा कर दिए।
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने बिना किसी वाजिब कारण के क्लेम देने से इनकार कर दिया। कंपनी ने कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
तीन सितंबर 2026 को वाद की सुनवाई कर आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने सदस्य अभिनव अग्रवाल और अमरजीत कौर की मौजूदगी में वाद की सुनवाई की।
इसमें दोनों पक्षों को सुनने के बाद कंपनी को दोषी पाया। आयोग ने स्पष्ट किया कि मुसीबत के समय ग्राहकों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करना बड़ी सेवा-त्रुटि है।
निर्णय सुनाया कि मूल क्लेम 61 हजार 923 रुपये की राशि, जिस तारीख को क्लेम रद किया गया था तब से लेकर भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ मिलेगी।
मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए पीड़ित को 20 हजार रुपये और वाद का खर्च उठाने के लिए पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ ही कंपनी के अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 20 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड सरकारी खजाने में जमा होगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन करने के लिए कंपनी को 45 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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