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    सिद्धार्थनगर में स्टे आदेश के बावजूद गिरफ्तारी: इटवा थाना प्रभारी पर कार्रवाई, पांच लाख मुआवजा

    Updated: Sat, 30 May 2026 03:55 PM (IST)

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्टे आदेश के बावजूद युवक को जेल भेजने पर इटवा थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उत्तर प्रद ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. स्टे आदेश के बावजूद युवक को जेल भेजा गया।

    2. इटवा थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश।

    3. पीड़ित को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश।

    जागरण संवाददाता, इटवा, (सिद्धार्थनगर)। स्टे के आदेश के बावजूद युवक को जेल भेजने के मामला में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश के साथ इटवा थाने के प्रभारी निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने के भी निर्देश दिए है। कोर्ट ने कहा कि युवक पर गिरफ्तारी की रोक के बाद गिरफ्तार करना न्यायालय के आदेश का खुला उल्लंघन है।

    न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि अंतरिम संरक्षण आदेश लागू होने के बाद भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेजना बेहद गंळाीर मामला और न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना है। ये मामला इटवा थाने में दर्ज मुकदमें से संबंधित है।

    इसमें युवती से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में अनिल सोनी के विरुद्ध दुष्कर्म एवं एससी एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया था। अनिल सोनी ने मुकदमें को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में रीट याचिका दाखिल की थी। जिस पर कोर्ट ने पली अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि रोक के आदेश के बाद भी इटवा पुलिस ने चार अप्रैल को अनिल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। स्वजन और अधिकवक्ताओं ने पुलिस को न्यायालय के आदेश की जानकारी देने का प्रयास किया गया, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

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    हाईकाेर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब गिरफ्तारी पर रोक का आदेश दिया गया तो सरकारी अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद थे। ऐसे में पुलिस द्वारा आदेश की जानकारी न होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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    न्यायालय द्वारा टिप्पणी की गई कि प्रदेश में ये चिंताजनक स्थिति बनती जा रही है या तो सरकारी अधिवक्ता अदालत के आदेश संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचाते हैं या फिर अधिकारी जानबूझकर आदेशों की अनदेखी करते हैं।

    कोर्ट ने थाना प्रभारी के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकार को निर्देश दिए गए कि एक माह के भीतर पीड़ित को पांच लाख का मुआवजा दिया जाए।

    सरकार ने ये स्पष्ट किया है कि सरकार चाहे तो यह राशि संबंधित थाना प्रभारी से वसूल सकती है। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन न होने की स्थिति में पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।

    युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का लगाया था आरोप
    बीते पांच जनवरी को युवती ने इटवा थाने में तहरीर देते हुए अनिल सोनी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपित के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया।

    मुकदमा दर्ज होने के बाद अनिल सोनी ने हाईकार्ठ का सहारा लेते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने से संबंधित आदेश पारित कराया था। रोक के बाद बीते चार अप्रैल को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया। इसके बाद अनिल सोनी ने न्यायालय का दरवाजा खटकटाया। कोर्ट ने आदेश की अवहेलना मानते हुए उक्त आदेश को जारी किया।