सिद्धार्थनगर के सिंचाई विभाग में AI का इस्तेमाल कर कराया गया 5 करोड़ का भुगतान, अधिकारी बोले- सभी आरोप निराधार
सिद्धार्थनगर सिंचाई विभाग पर AI का उपयोग कर 5 करोड़ रुपये के कामों का फर्जी भुगतान कराने का आरोप लगा है। शिकायत के बाद टीएसी टीम ने जांच की है, हालांक ...और पढ़ें

HighLights
नवंबर में सफाई जनवरी के वीडियो में झाड़ियों और गंदगी से पटी मिली नहर
विभाग के दावे पर उठे सवाल, शिकायत के बाद टीएसी टीम कर चुकी है जांच
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। एआई का इस्तेमाल कर साइबर ठगी जैसे अपराध आम हैं, लेकिन सरकारी विभाग में इस तकनीक के दुरुपयोग से करोड़ों का वारा न्यारा हुआ है। सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड में एआइ के बनाई तस्वीरों का इस्तेमाल करके विभिन्न काम पूरा दिखा कर करीब पांच करोड़ रुपये अवमुक्त करा लिए गए।
चार दिन पहले शासन से आई टीएसी की टीम मामले की जांच करके गई है। यह जांच भाजपा मंडल महामंत्री हरदी, बस्ती अमर बहादुर सिंह द्वारा मंडलायुक्त से की गई शिकायत पर हो रही है। भाजपा नेता ने साक्ष्य के रूप में तस्वीरें भी दी हैं। शिकायत के आलोक में संबंधित कार्यों की पड़ताल में भी भ्रष्टाचार की कलई खुल रही है। जहां नहरों की सिल्ट सफाई, विशेष मरम्मत, सड़क निर्माण, तटबंध मरम्मत जैसे कार्य पूरे दिखाए गए हैं, वहां तस्वीर ही अलग है।
शिकायत के अनुसार ड्रेनेज खंड के चतुर्थ उपखंड में नौगढ़ व अंतरी माइनर समेत विभिन्न नहरों पर सिल्ट सफाई, विशेष मरम्मत, सड़क नवीनीकरण, गड्ढामुक्ति और तटबंध मरम्मत के कार्य दिखाए गए हैं। आरोप है कि जिन कार्यों के लिए ट्रेजरी से भुगतान लिया गया, उनमें कई स्थानों पर धरातल पर अपेक्षित काम नहीं हुआ।
विभागीय अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके की स्थिति अलग बताई जा रही है। नौगढ़ माइनर की पड़ताल में शिकायत के आरोप काफी हद तक सही नजर आए। भीमापार से लेकर बसौना तक करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में कुछ स्थानों को छोड़ दें तो कहीं भी व्यापक सिल्ट सफाई या विशेष मरम्मत का कार्य नहीं दिखा। नहर के किनारों पर झाड़ियां उगी मिलीं और कई जगह सिल्ट जमा दिखी।
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बसौना से आगे सेमरियांव की तरफ कुछ स्थानों पर नहर से निकाली गई मिट्टी सड़क किनारे रखी जरूर मिली, लेकिन यह कार्य सीमित हिस्से तक ही दिखा। रेहरा निवासी अरुण मिश्रा उर्फ बबलू का कहना है कि नहर की समुचित सफाई नहीं हुई है। उनके अनुसार कुछ स्थानों पर थोड़ी-बहुत मिट्टी पिछले वर्ष जून में निकाली गई थी। वह भी तब, जब ग्रामीणों ने उनके नेतृत्व में तत्कालीन जिलाधिकारी से शिकायत की थी। उनका कहना है कि मौजूदा हालत देखकर यह नहीं लगता कि हाल के महीनों में बड़े स्तर पर सिल्ट सफाई का कार्य कराया गया हो।
शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव सिंचाई और प्रमुख अभियंता को भेजी शिकायत में कहा है कि निविदा संख्या-03/अधी.अभि./2025-26 के तहत जिन स्थानों पर कार्य प्रस्तावित थे, वहां अपेक्षित कार्य नहीं कराए गए। निविदा में अंतरी माइनर, नौगढ़ माइनर और सिसवा नेउरा का उल्लेख था, जबकि बाद में अन्य स्थानों का हवाला देकर भुगतान कर दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नवंबर-दिसंबर में सिल्ट सफाई का कार्य पूरा दिखाया गया, जबकि 25 जनवरी को सेमिरयांव के पास बनाया गया वीडियो दूसरी तस्वीर पेश कर रहा है। वीडियो में स्थान, तिथि और अक्षांश-देशांतर भी दर्ज हैं। इसमें नहर कई स्थानों पर झाड़ियों और सिल्ट से भरी दिखाई दे रही है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार वानगंगा नहर प्रणाली के एनुअल रिपेयर मद में 1.38 लाख रुपये और जमींदारी नहर प्रणाली के अनुरक्षण मद में करीब 90 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
सभी आरोप निराधार हैं। एआइ से फोटो तैयार करने जैसी बात पूरी तरह गलत है। मौके पर कार्य कराया गया है। टीएसी टीम जांच कर चुकी है और जिलाधिकारी भी मौके पर सड़क की जांच कर चुके हैं। किसी स्तर पर कोई कमी नहीं मिली है। उनके अनुसार शिकायतें मनगढ़ंत हैं और मौके पर लोगों कार्य दिख भी रहा है।- कृपाशंकर भारती, अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग
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