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    सिद्धार्थनगर में एमडीएम शेड में चल रहीं कक्षाएं, बारिश में बढ़ी मुसीबतें; मजबूर हुए छात्र

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 04:27 PM (IST)

    सिद्धार्थनगर के इटवा ब्लॉक के ककरही प्राथमिक विद्यालय में जर्जर भवन के कारण पिछले एक साल से अधिक समय से कक्षाएं मिड-डे मील शेड में चल रही हैं। बारिश म ...और पढ़ें

    एमडीएम शेड में संचालित हो रही कक्षाएं।

    एमडीएम शेड में संचालित हो रही कक्षाएं।

    HighLights

    1. ककरही प्राथमिक विद्यालय में कक्षाएं एमडीएम शेड में संचालित।

    2. बारिश में पानी टपकने, ठंड में हवाओं से बच्चे परेशान।

    3. जर्जर भवन ध्वस्त, नए भवन के लिए धन स्वीकृति लंबित।

    जागरण संवाददाता, इटवा(सिद्धार्थनगर)। सुनने में भले ही अजीब लगे, पर है सौ आना सच। इस दौर में भी प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की कक्षाएं भवन के बजाए एमडीएम (मिड-डे मील) शेड में चल रही हैं। बारिश में टीन शेड से पानी टपकने लगता है तो इससे पहले ठंड के मौसम में बर्फीली हवाओं ने भी बच्चों को परेशान किया। ये मामला इटवा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत हिंगुआ के प्राथमिक विद्यालय ककरही का है।

    यहां के पुराने भवन को ध्वस्त कराया गया, जबकि नए भवन के लिए अभी धन की स्वीकृति ही नहीं हुई। यही वजह है कि करीब एक वर्ष से ज्यादा समय से कक्षाएं एमडीएम शेड में संचालित हो रही हैं। उक्त प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया था। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई और फिर मई 2025 में नीलामी हुई। इसके बाद जून महीने में भवन को ध्वस्त कर दिया गया।

    तभी से कक्षाएं एमडीएम कक्ष में चल रही हैं। करीब 15 माह बाद भी नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। जहां पढ़ाई चल रही है, वहां हर समय बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 70 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। संख्या के हिसाब से एमडीएम शेट का स्थान कम पड़ रहा है। इसके बाद भी यहीं पर सभी कक्षाएं संचालित हो रही हैं। जहां शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में कठिनाई हो रही है तो छात्रों को भी नाना प्रकार की दुश्वारियों से दो-चार होना पड़ता है।

    बारिश के दिनों में शेड से पानी टपकने लगता है तो सर्द मौसम में स्थिति काफी कष्टदायक बनी रहती है। विद्यालय में अलग कार्यालय न होने के कारण शिक्षकों को मजबूरी में शौचालय के एक हिस्से को सामग्री रखकर कार्यालय के रूप में उपयोग करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को खुले में शौच जाना पड़ता है। यहां का हैंडपंप खराब है, इसके चलते पेयजल का भी संकट रहता है।

    शिक्षक प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले ध्वस्तीकरण के बाद से कक्षाएं एमडीएम शेड में संचालित की जा रही हैं। विभाग की ओर से पास के एक अन्य प्राथमिक विद्यालय में कक्षाएं संचालित करने का सुझाव दिया गया था, पर अधिकांश बच्चे दूसरे गांव जाने को तैयार नहीं हुए। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए सीमित संसाधन में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।

    अभिभावकों ने जताई चिंता

    अभिभावकों में मुकेश चौहान, जगदेव, विंध्यवासिनी, सीता, शिव रतन, रवीन्द्र ने बताया कि निरंतर नए भवन की मांग की जा रही है, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जब भी बच्चे स्कूल जाते हैं, हर समय चिंता बनी रहती है कि कहीं कोई घटना न हो जाए। प्रधान की तरफ से अहमद हुसैन ने बताया कि कई बार लिखित तौर पर भवन की मांग की गई, अभी तक कुछ नहीं किया गया।

    समस्या संज्ञान में है। जर्जर भवन होने के कारण उसे ध्वस्तीकरण किया गया। नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। धन की स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।- महेंद्र कुमार खंड शिक्षाधिकारी, इटवा

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