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    बुद्ध की धरती पर विकास की नई उड़ान: पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा का नया हब बन रहा है सिद्धार्थनगर

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 05:35 PM (IST)

    भगवान बुद्ध की पावन भूमि सिद्धार्थनगर पर्यटन, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और औद्योगिक निवेश में अभूतपूर्व विकास का साक्षी बन रहा है। कपिलवस्तु में विपश्यना ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. कपिलवस्तु में देश का पहला विपश्यना पार्क बना आकर्षण का केंद्र।

    2. 'काला नमक चावल' को मिली वैश्विक पहचान, किसानों को मिला लाभ।

    3. अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से शिक्षा-स्वास्थ्य में क्रांति।

    डिजिटल डेस्क, सिद्धार्थनगर। वह पावन भूमि जहां राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने जीवन के शुरुआती 29 वर्ष बिताए और मानवता को करुणा व शांति का संदेश दिया, आज अपनी बुद्धकालीन विरासत को सहेजते हुए आधुनिक विकास की एक नई मिसाल पेश कर रही है। 29 दिसंबर 1988 को नए जिले के रूप में अस्तित्व में आया सिद्धार्थनगर जनपद पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, सुदृढ़ कनेक्टिविटी और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव का साक्षी बना है।

    कपिलवस्तु में देश का पहला विपश्यना पार्क और बौद्ध पर्यटन का कायाकल्प

    कपिलवस्तु स्थित प्राचीन स्तूप, पिपराहा, गणवरिया, भारत भारी और बौद्ध संग्रहालय दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों तथा शोधार्थियों के लिए असीम आस्था का केंद्र रहे हैं। इसी कड़ी में कपिलवस्तु में देश का अनोखा विपश्यना पार्क और विपश्यना केंद्र निर्मित किया गया है, जहाँ प्रवेश करते ही मन को असीम शांति की अनुभूति होती है। इसके साथ ही बुद्ध थीम पार्क, लेजर एंड साउंड शो, पर्यटन सूचना केंद्र और अतिथि गृह जैसी सुविधाओं के विकास से पिछले कुछ वर्षों में यहाँ 16 लाख से अधिक देसी-विदेशी पर्यटक पहुँचे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली है।

    'बुद्ध का प्रसाद' काला नमक चावल बना वैश्विक पहचान

    'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत चयनित 'काला नमक चावल', जिसे भगवान बुद्ध का महाप्रसाद माना जाता है, अब वैश्विक बाजारों में अपनी खुशबू बिखेर रहा है। कभी विलुप्त होने की कगार पर पहुँचे इस सुगंधित चावल की खेती का रकबा बढ़कर कई गुना हो चुका है। सरकार द्वारा आयोजित 'काला नमक महोत्सव' और सिद्धार्थनगर महोत्सव के माध्यम से इसे राष्ट्रीय मंच मिला है। आज इंडिया गेट जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ-साथ बौद्ध राष्ट्रों में इसकी भारी मांग है, जिससे जिले के किसानों को उनकी फसल का बेहतरीन मूल्य मिल रहा है।

    227 करोड़ की लागत से निर्मित मेडिकल कॉलेज से मिली सुलभ चिकित्सा

    स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में माधव प्रसाद त्रिपाठी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण जिले के लिए वरदान साबित हुआ है। 509 बिस्तरों वाले इस अस्पताल परिसर में 18-बेड का आईसीयू, 20-बेड का बर्न यूनिट, 24x7 वातानुकूलित ब्लड बैंक और अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर पूरी तरह संचालित हैं। अब न्यूरो और गंभीर बीमारियों के मरीजों को लखनऊ या दिल्ली नहीं भागना पड़ता। यहाँ प्रतिदिन 60 से 70 सीटी स्कैन, 200 एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और 18 से 20 मेजर सर्जरीज निशुल्क व सुलभ तरीके से की जा रही हैं।

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    सिद्धार्थ विश्वविद्यालय बना अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का केंद्र

    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने पूर्वांचल के सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल तक के छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के द्वार खोले हैं। विज्ञान, कला, वाणिज्य, बीसीए, बीए-एलएलबी, एमबीए और बीएससी कृषि जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ यहाँ पूरी तरह डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी और 'पद्मा सरोवर' का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय, राजकीय पॉलीटेक्निक, आईटीआई और नर्सिंग कॉलेजों के माध्यम से जिले के बच्चों और बेटियों को घर के पास ही विश्वस्तरीय शिक्षा मिल रही है।

    एक्सप्रेसवे का संजाल और बढ़ता औद्योगिक निवेश

    गोरखपुर-सिद्धार्थनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, इंडो-नेपाल सीमा मार्ग, नॉर्थ-सोवथ कॉरिडोर और रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण से जिले की कनेक्टिविटी बेहद सुदृढ़ हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद माधव गोविंद फूड प्रोडक्ट्स, पूर्वांचल रबर फैक्ट्री, सिल्वर फाइन एग्रोवेट और ओडीओपी कुकीज यूनिट जैसी कई औद्योगिक इकाइयां यहाँ स्थापित हुई हैं। खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) इकाइयों और निर्बाध बिजली आपूर्ति के दम पर यह कृषि प्रधान जिला अब बड़े उद्योगपतियों की भी पहली पसंद बन रहा है।

    कपिलवस्तु की आध्यात्मिक शांति, काला नमक चावल की सौंधी महक, मेडिकल सुविधाओं का सुरक्षा कवच, बेहतर सड़कें और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का ज्ञान-क्षेत्र मिलकर आज सिद्धार्थनगर को अपनी पौराणिक विरासत के साथ 'बढ़ता उत्तर प्रदेश, दौड़ता भारत' के संकल्प की एक सजीव और प्रेरक मिसाल बना रहे हैं।