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    सिद्धार्थनगर में फर्जी वीजा से विदेश नौकरी का झांसा, लाखों की ठगी का शिकार हुए युवा

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 12:09 PM (IST)

    भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी वीजा और टिकट थमाकर लाखों की ठगी की जा रही है। शोहरतगढ़ और बढ़नी ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. बेरोजगार युवाओं को फर्जी वीजा-टिकट से ठगा जा रहा है।

    2. शोहरतगढ़-बढ़नी क्षेत्र में कई ठगी के मामले उजागर हुए।

    3. प्रशासन से फर्जी एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग की गई।

    जागरण संवाददाता, शोहरतगढ़, (सिद्धार्थनगर)। बेहतर भविष्य और विदेश में रोजगार का सपना भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के कई युवाओं के लिए महंगा साबित हो रहा है। शोहरतगढ़ और बढ़नी क्षेत्र में सक्रिय ठग गिरोह बेरोजगारी और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा दे रहे हैं। आकर्षक वेतन, मुफ्त आवास और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर ये गिरोह लाखों रुपये वसूल लेते हैं और बाद में फर्जी वीजा, टिकट तथा दस्तावेज थमाकर फरार हो जाते हैं।

    सीमा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें युवाओं के साथ बड़ी आर्थिक ठगी हुई है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि एजेंट पहले भरोसा जीतते हैं और फिर पासपोर्ट, वीजा, मेडिकल तथा अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर मोटी रकम जमा करा लेते हैं। जब विदेश जाने का समय आता है, तब तक ठगी का खेल सामने आ चुका होता है।

    चिल्हिया थाना क्षेत्र के गौहनिया में 10 मार्च 2024 को ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ था। नियांव नानकार निवासी मनोज कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। आरोप है कि गौहनिया चौराहे पर संचालित एक ट्रैवल एजेंसी ने विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कई लोगों से लाखों रुपये वसूले। छह फरवरी 2024 को वीजा, टिकट और अन्य दस्तावेज सौंपे गए, लेकिन 15 लोग जब लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे तो जांच में सभी दस्तावेज फर्जी निकले। वापस लौटने पर एजेंसी का कार्यालय बंद मिला।

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    इससे पहले दिसंबर 2022 में शोहरतगढ़ नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित एक ट्रैवल एजेंसी पर ओमान भेजने के नाम पर करीब 28 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा था। जनपद के अलावा गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया और कुशीनगर के 40 से अधिक लोगों से प्रति व्यक्ति 70 हजार रुपये जमा कराए गए। एक दिसंबर 2022 को सभी लोग लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि उनके वीजा और टिकट फर्जी हैं। जब पीड़ित एजेंसी के कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला।

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    स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवा विदेशों में रोजगार की तलाश करते हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर ठग सक्रिय हो जाते हैं। लोगों ने प्रशासन से फर्जी ट्रैवल एजेंसियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने, एजेंटों की निगरानी बढ़ाने और गांव-गांव जागरूकता अभियान संचालित करने की मांग की है, ताकि युवा ठगी और संभावित मानव तस्करी जैसे अपराधों का शिकार होने से बच सकें।