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    नैमिषारण्य को पश्चिमी भारत से जोड़ेगी नई रेल लाइन, बनेगा आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 09:57 AM (IST)

    गाजियाबाद से सीतापुर तक दो नई रेल लाइनें बिछाने की परियोजना को मंजूरी मिली है, जिससे नैमिषारण्य की पश्चिमी भारत से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। यह पहल तीर्थनगर ...और पढ़ें

    नैमिषारण्य के ललिता देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़। जागरण

    नैमिषारण्य के ललिता देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़। जागरण

    HighLights

    1. गाजियाबाद-सीतापुर के बीच दो नई रेल लाइनें स्वीकृत।

    2. नैमिषारण्य की पश्चिमी भारत से कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

    3. तीर्थनगरी में पर्यटन और आध्यात्मिक परिपथ को बढ़ावा।

    नोट : सिर्फ इंट्रो में संशोधन किया गया है।
    /Bयूएमएस के लिए/B
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    चित्र-21 एसआइटी, 09 व 21

    विकास
    -गाजियाबाद से सीतापुर के लिए दो नई रेल लाइन बिछाए जाने से रेलसेवा होगी बेहतर, तीर्थाटन को मिलेगा बढ़ावा

    जगदीप शुक्ल, जागरण

    सीतापुर : 88 हजार ऋषियों की तपोस्थली नैमिषारण्य को सरकार तेजी से पर्यटन के नक्शे पर वैश्विक पटल पर उभारने के प्रयास कर रही है। तीर्थनगरी के समग्र विकास के साथ ही रेल, सड़क और हवाई सेवाओं को भी बेहतर किया जा रहा है। तीर्थनगरी में हेलीपोर्ट बनाने के बाद गाजियाबाद से सीतापुर तक दो नई रेल लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दी गई है। गाजियाबाद से सीतापुर तक दो नई रेल लाइन बिछाने नैमिषारण्य देश के पश्चिम क्षेत्र से जुड़ेगा और एक नया आध्यात्मिक परिपथ (कारिडोर) बनेगा। हालांकि, दिसंबर 2025 में लखनऊ से सहारनपुर के लिए वंदेभारत एक्सप्रेस का संचालन कर इस दिशा में पहल कर दी गई थी। पूर्वोत्तर रेलवे के जन संपर्क अधिकारी महेश गुप्ता के मुताबिक एक मार्च से 14 अप्रैल के मध्य वंदेभारत से करीब 23,519 लोगों ने यात्रा की है। इसमें 14,519 जाने और करीब 9000 वहां से आने वाले हैं।

    दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं का तीर्थनगरी से पहले से ही आध्यात्मिक जुड़ाव है। वह यहां आकर न सिर्फ धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन करते हैं बल्कि उन्होंने यहां त्रिशक्ति धाम, श्री बालाजी धाम और त्रिपुर सुंदरी जैसे मंदिर व आश्रमों का भी निर्माण करवाया है। अब इन दो नई रेल लाइन बिछाए जाने से रेल सेवाएं बेहतर होंगी, जिससे दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा जैसे उत्तर-पश्चिम भारत के श्रद्धालुओं का तीर्थनगरी से जुड़ाव बढ़ेगा। अभी बेहतर रेल सेवा न होने से महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश के सीमित संख्या में ही श्रद्धालु तीर्थनगरी में दर्शन-पूजन को पहुंचते हैं।
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    /Bयह बन सकता है नया आध्यात्मिक परिपथ/B

    गाजियाबाद से सीतापुर तक करीब 403 किलोमीटर लाइन 14,926 करोड़ रुपये की लागत से तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएगी।चार वर्ष में यह कार्य पूरा होना है। दूसरी ओर, नैमिषारण्य का विकास भी तेजी से कराया जा रहा है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक यह दो लाइन बिछने के बाद मालगाड़ी और सवारी गाड़ी के लिए ट्रैक अलग-अलग किए जा सकते हैं। साथ ही तेज गति वाली कुछ नई ट्रेनों का भी इस रूट पर संचालित शुरू किया जा सकता है। इससे रेल सेवाओं की पश्चिम के तीर्थस्थलों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे हरिद्वार, सहारनपुर की शाकंभरी शक्तिपीठ, हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर, नाथनगरी बरेली, नैमिषारण्य और पश्चिम के धर्मस्थलों का एक नया आध्यात्मिक परिपथ बनेगा।
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    नैमिषारण्य के साथ ही विभिन्न स्थानों के धर्मस्थलों के साथ ही जलाशयों पर पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। गाजियाबाद से सीतापुर तक रेलवे लाइन की संख्या बढ़ने से आवागमन सुगम होगा। प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ पर्यटकों के बढ़ने की संभावना है। अब तक तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु तीर्थाटन के लिए नैमिषारण्य आ रहे हैं।
    -डा. राजा गणपति आर., जिलाधिकारी