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    सीतापुर में धान-मक्के की 400 बीघा फसल पानी में डूबी, नदी ने शुरू किया कटान; पशुओं के लिए नहीं मिला भूसा

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 04:42 PM (IST)

    शारदा-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से सीतापुर में 400 बीघा धान-मक्के की फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। नदी कटान भी कर रही ह ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. शारदा-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ा, 400 बीघा फसलें जलमग्न।

    2. नदी कटान कर रही, 125 गांवों में बाढ़ का डर।

    3. पशुओं के लिए चारे का संकट, प्रशासन से नहीं मिला भूसा।

    जागरण टीम, सीतापुर। शारदा-घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है, इससे दहशत है। नदी तटवर्ती खेतों में खड़ी फसलों में पानी भरा है। मक्का, धान, उरद की फसल जलमग्न हैं। कई दिन से पानी भरा होने से नुकसान होना तय है। इसको लेकर किसान परेशान हैं। उधर नदी ने कटान शुरू कर दिया है।

    तटवर्ती करीब 125 गांवों के बाशिंदों में दहशत बढ़ गई है। जलभराव से पशुओं के लिए चारे का संकट है। तहसील प्रशासन से अब तक पशुओं के लिए भूसा नहीं मिला, पशुपालक परेशान हैं।

    रामपुर मथुरा : फसलों में कई दिनों से पानी भरा होने से किसान परेशान हैं। मक्का की फसल पीली पड़ने लगी है। धान का पौधा गलने लगा है। उरद तो पानी भरते ही गल गया। शुकुलपुरवा के मजरा बचऊपुरवा और नागेश्वर पुरवा का संपर्क अभी भी सामान्य नहीं है। ग्रामीणों को गांव आने-जाने के लिए कंधई घाट और बांके घाट पर नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

    प्यारेपुरवा गांव भी चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरा है। किसान मिश्रीलाल ने बताया कि उनकी पांच बीघा धान की फसल तीन दिनों से डूबी होने से गलने लगी है। बरहिया के पराग ने बताया कि उनकी तीन बीघा मक्के की फसल पानी भरने से पूरी तरह बर्बाद हो गई।

    तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि नुकसान का सर्वे करवा रहे हैं। प्रभावित किसानों को मदद दिलाएंगे। जहां पानी भरा है, वहां पर आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था कराई है।

    दुर्गापुरवा के पास हो रही कटान

    जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गार्गी पुरवा, सोमवारी पुरवा, लोधपुरव छोलहा अवस्थी पुरवा, आजाद नगर, ताहपुर, बजहा, निर्मल पुरवा करीब 65 गांवों के लोगों में कटान का भय है। फसलों में पानी भरा है। दुर्गापुरवा के पास नदी खेतों का कटान कर रही है। गार्गी पुरवा, निर्मल के पास सिंचाई विभाग से बने स्टड पिछले वर्ष कट गए थे। उमेश कुमार, संत प्रसाद ने इनको बनवाने की मांग की है। जिससे कटान रोका जा सके। जंगल टपरी के राम केश, राम कुमार ने बताया कि पशुओं को अभी टीके नहीं लगाए गए।

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    नदी में कटा घर, पैसा मिला जमीन नहीं, तिरपाल में जीवन यापन

    कोल्हूपुरवा में कटान प्रभावित छह परिवार तिरपाल में रह रहे हैं। पिछले वर्ष इनके घर नदी में कट गए थे। प्रशासन से एक लाख बीस हजार रुपये मिले, घर बनाने के लिए जमीन नही दी गई। पीड़ित राधा देवी, गुलाबा, शिवानी, चंद्रभाल, मोहित, महेश तिरपाल डालकर रहते हैं।

    बारिश में मुश्किलें होती हैं। रात में बिजली की सुविधा भी नही है। जहां रहते हैं वह जमीन किसानों की है। तहसीलदार लहरपुर मनीष त्रिपाठी ने बाढ़ आने पर राहत कार्य शुरू होगा, पीड़ित परिवारों की अन्य दिक्कतें दूर कराएंगे।