सीतापुर में बाघिन का आतंक जारी, नौ दिन बाद भी पकड़ से दूर, डर के साए में ग्रामीण
मिश्रिख के रसुलवा में एक व्यक्ति पर हमला करने वाली बाघिन नौ दिनों बाद भी पकड़ से बाहर है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। ...और पढ़ें

सीतापुर: बाघ प्रभावित गांव बिजुआमऊ में ड्रोन उड़ाते वनकर्मी: जागरण
HighLights
मिश्रिख में बाघिन ने व्यक्ति पर हमला कर मार डाला था।
नौ दिन बाद भी बाघिन पकड़ से बाहर, ग्रामीण डरे हुए।
बारिश के कारण वन विभाग को खोज में दिक्कतें आ रही हैं।
जागरण संवाददाता, सीतापुर। मिश्रिख के रसुलवा में 15 जुलाई को बाघिन ने हमला करके एक व्यक्ति को मार डाला था। नौ दिन बीत चुके हैं। वन विभाग बाघिन को पकड़ नहीं पाया है। ग्रामीण डर के साए में हैं।
किसान खेतों नहीं जा रहे हैं, बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है। पांच गांवों के स्कूलों में 50 प्रतिशत हाजिरी कम हो गई है। ग्रामीण वन विभाग पर बाघिन पकड़ने में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
घटना के बाद से आए दिन रसुलवा गांव के आसपास सात किलोमीटर दायरे में बाघिन के पगचिह्न मिल रहे हैं। शनिवार को जाजपुर और पड़ोसी गांव बिजुआमऊ में पगचिह्न मिले हैं।
इससे पहले सिसेंडी, पट्टी, गेंधरिया, उपरहितापुर आदि गांवों में पगचिह्न मिले चुके हैं। बाघिन लगातार लोकेशन बदल रही है। वन विभाग उसे पकड़ने में फेल है।
उधर, ग्रामीण डर के साए में हैं। किसान खेत तो बच्चे भी स्कूल नहीं जा राहे हैं। इन गांवों के विद्यालयों में लगभग 50 प्रतिशत बच्चे ही आ रहे हैं। जो आ रहे हैं उन्हें परिवारजन विद्यालय तक छोड़ने आते हैं।
बच्चों की अकेले विद्यालय तक जाने की हिम्मत नहीं पड़ती। उपरहितापुरवा के ब्रजेश ने बताया कि बाघिन के डर से जीना मुश्किल है। बच्चों को विद्यालय तक ले जाने के लिए समूह बनाकर जाना पड़ता है।
बहादुरपुर के महिपाल ने बताया कि उपरहितापुर के श्रीकेशन के खेत में बाघिन छिपी थी। अगर वन विभाग की ओर से जाल लगाया जाता तो उसे पकड़ लिया गया होता। धंसीननगर के गिरधारी ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ ही किानी प्रभावित है।
बारिश के चलते सर्च अभियान में परेशानियां आ रही हैं। वन विभाग पूरी क्षमता से बाघिन को पकड़ने का प्रयास कर रहा है। गंधरिया में पड़वा बांधा गया है, काबिंग की जा रही है।
-सिकंदर सिंह, वन क्षेत्राधिकारी मिश्रिख