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    डिमांड शून्य होने पर भी विभाग वापस नहीं दे रहा आइटीसी का लाभ, व्यापारियों ने राज्य कर विभाग की बताई खामियां

    By mukesh chandra srivastavaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Sat, 17 Jan 2026 06:30 PM (IST)

    वाराणसी में राज्य कर विभाग के व्यापारी संवाद में व्यापारियों ने कई मुद्दे उठाए। उन्होंने बिना सुनवाई बोगस डिमांड और शून्य डिमांड पर भी ITC वापस न मिलन ...और पढ़ें

    सोनभद्र से जुड़े व्यापारियों ने मांग किया कि बिना व्यापारी को सुने विभाग द्वारा बोगस डिमांड जारी न किया जाए।

    सोनभद्र से जुड़े व्यापारियों ने मांग किया कि बिना व्यापारी को सुने विभाग द्वारा बोगस डिमांड जारी न किया जाए। 

    HighLights

    1. शून्य डिमांड पर भी ITC लाभ न मिलने की शिकायत।

    2. व्यापारियों ने GST ट्रिब्यूनल के शीघ्र गठन की मांग की।

    3. ऑनलाइन सुनवाई और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। राज्य कर विभाग की ओर से शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में व्यापारी संवाद का आयोजन हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र से जुड़े व्यापारियों ने मांग किया कि बिना व्यापारी को सुने विभाग द्वारा बोगस डिमांड जारी न किया जाए। उन्होंने कहा कि कई मामले में ऐसा भी देखा गया क‍ि डिमांड जीरो होने के बाद भी व्यापारी की बची आइटीसी को समायोजित कर दिया गया परंतु डिमांड जीरो होने पर आइटीसी वापस नहीं किया गया। व्यापारियों ने यह भी मांग उठाई कि जीएसटी के लिए ट्रिब्यूनल का शीघ्र गठन किया जाए।

    संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों ने मांग की कि आनलाइन सुनवाई की सुविधा दी जाए। लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग उठाई। कहा कि जीएसटी कानून में लिमिटेशन एक्ट की स्पष्ट एवं एक रूप व्यवस्था होनी चाहिए। विभिन्न धाराओं में समय सीमा अलग-अलग होने से व्यापारियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके कारण करदाता तकनीकी कारणों से अपील एवं राहत से वंचित हो रहे हैं।

    बताया कि यदि कोई व्यापारी अपने किसी व्यक्तिगत परेशानियों की वजह से जीएसटी रिटर्न समय से दाखिल नहीं कर पा रहा है एवं जीएसटीआर 3बी या जीएसटी आर 1 समय पर नहीं भरा तो अधिकारी व्यापारी को धारा 46 के तहत नोटिस भेज सकते हैं। इसमें 15 दोनों का समय दिया जाता है, लेकिन 15 दिनों के अंदर ही धारा 125 के तहत 25 हजार अर्थ दंड लगाया गया है। वहीं यह अधिकतम सीमा है यानी अधिकारी उचित कारणों को जानकर यह धनराशि कम कर सकता है अथवा माफ भी कर सकता है।

    उन्होंने कहा कि जब व्यापारी समय से रिटर्न न भरने की वजह से लेट फीस, ब्याज का भुगतान कर रहा है उस दशा में अर्थ दंड लगाया जाना औचित्य पूर्ण नहीं है। बैठक में व्यापार संगठन के जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा, नगर अध्यक्ष प्रशांत जैन, नरेंद्र गर्ग, विमल अग्रवाल, चंदन केसरी, रमेश जायसवाल, संदीप सिंह, आनंद जायसवाल आदि उपस्थित रहे। अपनी मांगों को लेकर व्यापारियों ने राज्य कर विभाग के संयुक्त आयुक्त कारपोरेट सुनील कुमार को ज्ञापन सौंपा।

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    वहीं इससे पहले अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रमेश कुमार, एसजीएसटी के अपर आयुक्त सूर्यभान सिंह, उपायुक्त (प्रशासन) योगेश द्विवेदी, एसटीओ सीताराम, जीएसटी में पंजीयन लेने की प्रक्रिया, पंजीयन के लिए आवश्यक प्रपत्र एवं पंजीयन से होने वाले लाभों के संबंध में बताया। सहायक आयुक्त राम विजय पंजीकृत व्यापारियों को मिलने वाले 10 लाख रुपये मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र श्रीवास्तव, यतीश मिश्रा, सीए अखिलेश पांडेय ने उत्पादों की कीमतों में बदलाव के बाद परिवर्तित दरों की जानकारी के लिए सरकार द्वारा जारी वेबसाइट http:savingwithgst.in के बारे में बताया।