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    सोनभद्र में अवैध खनन पर एनजीटी का बड़ा फैसला, 99 लाख का जुर्माना, तीन माह के अंदर कार्रवाई का निर्देश

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 07:09 PM (IST)

    राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सोनभद्र में अवैध खनन और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप में एक खनन संचालक पर 99 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. एनजीटी ने अवैध खनन पर 99 लाख का जुर्माना लगाया।

    2. स्वीकृत पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन और अधिक खुदाई मिली।

    3. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन माह में कार्रवाई का निर्देश।

    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अवैध खनन व पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में खनन संचालक पर 99 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया है।

    एनजीटी में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि परियोजना प्रस्तावक अरुण कुमार राबर्ट्सगंज तहसील के बिल्ली मरकुंडी गांव में खतरनाक गड्ढे खोदकर खनन कर रहा है।

    पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। जिला पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने वर्ष 2016 में दी गई अनुमति का राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया था।

    20 जुलाई को जारी आदेश में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि पहले गठित एक पैनल ने स्थल का निरीक्षण किया और कई उल्लंघनों की पहचान की। इनमें स्वीकृत पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन, अनुमति से अधिक खुदाई, अनिवार्य सीमा स्तंभों का न होना समेत कई कमियां पाई गईं।

    इतना ही नहीं परियोजना प्रस्तावक ने पुनर्मूल्यांकन कराने के बजाय तथ्यों को छिपाकर मई 2025 में नई अनुमति प्राप्त कर ली। मामला खुलने पर प्राधिकरण ने प्रस्ताव खारिज कर सितंबर 2025 में मंजूरी रद कर दी।

    एनजीटी ने माना कि रिकार्ड पर रखे गए तथ्यों से स्पष्ट है कि अनुमति सीमा से अधिक अवैध खनन और कई पर्यावरणीय उल्लंघन हुए हैं। फिर एक संयुक्त समिति गठित की। निर्देश दिया गया कि परियोजना प्रस्तावक गड्ढों को छह माह में पूरा भरकर उसे मूल स्थिति मेें ला दे।

    प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने आठ मई 2025 को परियोजना प्रस्तावक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उस पर पर्यावरण मानकों के उल्लंघन और अत्यधिक खनन के लिए 99.72 लाख रुपये से अधिक का पर्यावरणीय हर्जाना लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। एनजीटी ने प्रदूषण कंट्राेल बोर्ड को तीन माह के भीतर पर्यावरणीय हर्जाना लगाने का आदेश दिया है।

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    बता दें कि नियमों के विपरीत खनन से ओबरा तहसील के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में पिछले साल खनन हादसे में सात लोगोें की जान जा चुकी है। यहां पर्यावरण मानकों की भी अनदेखी की जाती है। धूल और धुआं से क्षेत्रीय लोग परेशान होते हैं।