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    कैंसर पीड़‍ित बच्‍ची को अकेलापन ना हो महसूस इसल‍िए सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान ने मुंडवा ल‍िया स‍िर

    By Mukesh Chandra SrivastavaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:09 PM (IST)

    सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान ने कैंसर पीड़ित बच्ची की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अपना सिर मुंडवा लिया। उनके इस कदम ने महिलाओं की सुंदरता ...और पढ़ें

    कैंसर पीड़ित बच्ची के लिए सिंगरौली आयुक्त सविता प्रधान ने मुंडवाया सिर।

    कैंसर पीड़ित बच्ची के लिए सिंगरौली आयुक्त सविता प्रधान ने मुंडवाया सिर।

    HighLights

    1. सिंगरौली आयुक्त सविता प्रधान ने कैंसर पीड़ित बच्ची के लिए सिर मुंडवाया।

    2. बच्ची को अकेलापन महसूस न हो, इसलिए लिया यह निर्णय।

    3. महिलाओं की सुंदरता, आत्मविश्वास पर समाज में नई बहस छिड़ी।

    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। सिंगरौली नगर निगम की आयुक्त सविता प्रधान ने हाल ही में एक विशेष कारण से अपने सिर का मुंडन कराया, जिससे समाज में महिलाओं की सुंदरता और आत्मविश्वास को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हो गई है। सविता प्रधान ने शनिवार रात अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बिना बालों वाली अपनी तस्वीरें साझा कीं, जिसके बाद इंटरनेट मीडिया पर उनकी इस पहल को लेकर विभिन्न चर्चाएं होने लगीं।

    रविवार को सविता प्रधान ने स्पष्ट किया कि उनके इस निर्णय का किसी पारिवारिक शोक या व्यक्तिगत दुख से कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से उनका निजी निर्णय है, जो उन्होंने कैंसर से जूझ रही एक बच्ची की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए लिया।

    बताया जा रहा है कि कैंसर उपचार के कारण बच्ची के सिर के बाल झड़ गए थे, और उसने इच्छा जताई थी कि कोई उसके जैसा दिखे ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो। इस भावना को समझते हुए सविता प्रधान ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना सिर मुंडवा लिया।

    सविता प्रधान ने अपने पोस्ट में लिखा कि समाज में आज भी महिलाओं की सुंदरता को लंबे बालों और बाहरी रूप-रंग से जोड़ा जाता है, जबकि वास्तविक सुंदरता आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और क्षमता में होती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुषों के गंजे होने को सामान्य माना जाता है, लेकिन महिलाओं के बिना बालों के दिखने पर लोग असहज हो जाते हैं। इस सोच में बदलाव की आवश्यकता है।

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    सविता प्रधान ने अपने इस कदम को लेकर कहा कि उन्हें सिर मुंडवाने से मानसिक संतोष और खुशी मिली है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बाहरी रूप के बजाय व्यक्ति के आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को महत्व दें। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर महिला स्वतंत्रता, सामाजिक सोच और सुंदरता की परिभाषा को लेकर व्यापक चर्चा छिड़ गई है।

    इस पहल ने न केवल सविता प्रधान को बल्कि समाज को भी एक नई दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया है। यह कदम उन सभी के लिए एक उदाहरण है जो किसी न किसी कारण से आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं। सविता प्रधान की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची सुंदरता बाहरी रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर होती है।

    सविता प्रधान का यह कदम न केवल एक बच्ची की इच्छा को पूरा करने के लिए था, बल्कि यह समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके आत्मविश्वास को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें अपने पूर्वाग्रहों को छोड़कर एक नई सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हालांक‍ि बच्‍ची का पक्ष उनके मुंडन करवाने के बाद सामने नहीं आ सका है।