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    सोनभद्र बनेगा मक्का उत्पादन का हब, एथेनॉल इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार

    Updated: Fri, 29 May 2026 04:56 PM (IST)

    सोनभद्र जनपद एथेनॉल की बढ़ती मांग के कारण मक्का उत्पादन का बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है, इस खरीफ सीजन में मक्का की खेती का लक्ष्य दोगुना कर 77,082 ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, सोनभद्र। जनपद अब मक्का उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। एथेनॉल की बढ़ती मांग को देखते हुए इस बार खरीफ सीजन में जिले में 77,082 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुना है, तब 38,201 हेक्टेयर में ही मक्का की बोआई हुई थी। जिले के दुद्धी, बभनी, म्योरपुर और कोन क्षेत्र मक्का उत्पादन के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं, जहां की भौगोलिक परिस्थितियां इस फसल के लिए अनुकूल हैं। किसानों की रुचि भी लगातार मक्का की खेती की ओर बढ़ रही है, जिसका प्रमुख कारण इसकी बेहतर कीमत और एथेनॉल उद्योग में बढ़ती खपत है।

    प्रदेश सरकार की यूपी एग्रोज योजना के तहत पूर्वांचल के तीन जिलों वाराणसी, मीरजापुर और सोनभद्र को शामिल करते हुए पायलट प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा है। इस योजना के जरिए किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    धान से अधिक खरीफ सीजन में मक्के का रकबा

    जनपद में मक्का ऊपज बढ़ाने के लिए पहली बार धान से अधिक का रकबा तय किया है। खरीफ सीजन में धान का रकबा 68,073 रखा गया है जबकि मक्का का रकबा 77,082 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।

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    तीसरे स्थान पर अरहर का रखा गया है। इसका बोआई लक्ष्य 28,604 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। जनपद का मौसम भी मक्का खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है, जिसके कारण इसकी खेती पर इस बार विशेष जोर दिया जा रहा है।

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    2.01 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल का है लक्ष्य

    जनपद में इस बार खरीफ फसल का लक्ष्य दो लाख 998 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। धान, मक्का व अरहर को छोड़ दिया जाए तो मोटे अनाज की खेती 11 हजार हेक्टेयर में इस बार बोआई का लक्ष्य रखा गया है। ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, तिल व मूंगफली की भी जनपद में पैदावार बेहतर होती है।

    खरीफ सीजन में जनपद में 77,082 हेक्टेयर भूमि पर मक्का बोआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, यह पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है। एथेनाल की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। किसानों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी।

                                                                     संदीप कुमार मौर्य, अपर जिला कृषि अधिकारी