सोनभद्र में कोचिंग और शिक्षण संस्थानों की जांच तेज, दो डिजिटल लाइब्रेरी सील
सोनभद्र में अग्नि सुरक्षा और भवन सुरक्षा व्यवस्थाओं की पड़ताल के तहत घोरावल और अनपरा क्षेत्र में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में दो डिजिटल लाइब् ...और पढ़ें

कोचिंग और शिक्षण संस्थानों की जांच तेज।
HighLights
सोनभद्र में अग्नि सुरक्षा जांच अभियान जारी।
घोरावल में दो डिजिटल लाइब्रेरी सील की गईं।
अनपरा में बहुमंजिला भवनों में सुरक्षा खामियां मिलीं।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुई दर्दनाक घटना के बाद दैनिक जागरण के जनसरोकार अभियान के तहत जिले में अग्नि सुरक्षा और भवन सुरक्षा व्यवस्थाओं की पड़ताल लगातार जारी है।
अभियान के चौथे दिन शुक्रवार को घोरावल और अनपरा क्षेत्र में सामने आई तस्वीरों ने सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कहीं बिना मानकों के लाइब्रेरी संचालित मिलीं तो कहीं बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन सुरक्षा की व्यवस्था तक नहीं मिली।
घोरावल में नायब तहसीलदार विदित तिवारी ने फायर सर्विस टीम और पुलिस बल के साथ कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी व अन्य शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान वार्ड नंबर दो स्थित सक्सेस डिजिटल लाइब्रेरी एंड बुक स्टेशनरी तथा कान्हा डिजिटल लाइब्रेरी सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि दोनों संस्थानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
अनपरा परिक्षेत्र में दैनिक जागरण की पड़ताल में बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा के प्रति भारी लापरवाही सामने आई। अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं मिली, जबकि कई भवन बिना नक्शा स्वीकृत कराए ही खड़े कर दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र के अधिकांश भवन परियोजना और वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि शक्तिनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ने मार्च 2025 में परियोजना भूमि पर हुए अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था।
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सुनवाई में भी यह स्पष्ट हुआ था कि कई निर्माण बिना वैध भू-स्वामित्व और बिना स्वीकृत नक्शे के किए गए हैं। इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण अवैध निर्माण लगातार बढ़ते गए।
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इस संबंध में साडा के जेई अंशु गर्ग ने मामले की जानकारी होने से इंकार किया, जबकि जेई देवेन्द्र यादव ने स्वीकार किया कि एनसीएल की भूमि पर बड़ी संख्या में बहुमंजिला भवन बने हैं और परियोजना प्रबंधन को समय-समय पर कब्जा हटाने के लिए नोटिस भेजे जाते रहे हैं।
नियम की अनदेखी करके संचालित कोचिंग सेंटर या फिर अन्य व्यवसायिक भवनों पर कार्रवाई चल रही है। कोचिंग सेंटर सील होने के बाद वहां पर पढ़ रहे छात्रों के लिए कोचिंग सेंटर संचालक को निर्देशित किया जाएगा कि वह वैकल्पिक व्यवस्था करें, हालांकि इस विषय पर संबंधित अधिकारियों से भी वार्ता की जाएगी। छात्रों के भविष्य को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है। -चर्चित गौड़, जिलाधिकारी।