सोनांचल में लौटेगी देशी सब्जियों की खुशबू, हाइब्रिड से बनेगी दूरी; 80 एकड़ में खेती कराने की तैयारी
सोनभद्र के सोनांचल क्षेत्र में 80 एकड़ भूमि पर देशी सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल हाइब्रिड किस्मों से दूरी बनाकर पारंपरिक स्वाद, पौष्ट ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सोनभद्र में 80 एकड़ पर देशी सब्जियों की खेती शुरू होगी।
हाइब्रिड किस्मों से दूरी बनाकर पारंपरिक बीजों का संरक्षण।
किसानों को प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। सोनांचल के किसानों को जल्द ही देशी नस्ल की सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उद्यान विभाग ने पहले चरण में जिले के 80 एकड़ क्षेत्र में देशी सब्जियों की खेती कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत राबर्ट्सगंज, घोरावल, करमा और चतरा विकासखंड से होगी।
योजना सफल होने पर अगले चरण में अन्य ब्लॉकों तक इसका विस्तार किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान अधिक उत्पादन देने वाली हाइब्रिड किस्मों की ओर बढ़ा है।
इससे उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन देशी सब्जियों का स्वाद, पौष्टिकता और पारंपरिक बीज तेजी से खत्म होते गए। अब सरकार स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी किस्मों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दे रही है।
इन नस्लों पर रहेगा जोर, तैयारी शुरू
योजना के तहत करैला, नेनुआ, भिंडी, कोहड़ा, लौकी, टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियों की देशी किस्मों की खेती कराई जाएगी। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों (आईजीआर) से बीज एवं पौध उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के साथ खेती की पूरी प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी।
देशी सब्जियां कम रासायनिक उर्वरकों में भी बेहतर गुणवत्ता देती हैं। इनका स्वाद, पोषण और बीज संरक्षण की क्षमता अधिक होती है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो जिले में देशी बीजों का संरक्षण होने के साथ किसानों को बेहतर बाजार भी मिल सकेगा।
क्या होती हैं देशी नस्ल की सब्जियां
देशी नस्ल या नेटिव सब्जियां वे पारंपरिक किस्में होती हैं, जिन्हें वर्षों से स्थानीय किसान अपने बीजों से उगाते रहे हैं। यह स्थानीय जलवायु के अनुकूल होती हैं, इनमें स्वाद और पौष्टिकता अधिक मानी जाती है तथा इनके बीजों का दोबारा उपयोग भी किया जा सकता है। वहीं हाइब्रिड किस्मों के बीज हर सीजन नए खरीदने पड़ते हैं।
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देशी नस्ल की सब्जियों को एक बार फिर से बड़े स्तर पर खेती की जाएगी। पहले चरण में 80 एकड़ भूमि पर यह काम किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली गयी है। -मेवाराम, जिलाा उद्यान अधिकारी।
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