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बिजली इकाइयां ठप होने से बढ़ा संकट, सोनभद्र में महंगी लाइट खरीदने को मजबूर हुआ प्रबंधन

Published: Mon, 03 Aug 2026 08:12 PM (IST)

प्रदेश में 31 हजार मेगावाट से अधिक बिजली मांग और कई इकाइयों के ठप होने से गहराया बिजली संकट। प्रबंधन ...और पढ़ें

बिजली इकाइयां ठप होने से महंगी बिजली खरीदने को मजबूर हुआ प्रबंधन।

बिजली इकाइयां ठप होने से महंगी बिजली खरीदने को मजबूर हुआ प्रबंधन।

HighLights

  1. प्रदेश में बिजली की मांग 31 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है।

  2. अनपरा, ओबरा, पनकी की कई इकाइयां तकनीकी खराबी से बंद हुई हैं।

  3. बिजली प्रबंधन को वैकल्पिक स्रोतों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।

जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। प्रदेश में उमस भरी गर्मी के चलते बिजली की मांग लगातार 31 हजार मेगावाट के पार बनी हुई है। दूसरी ओर विभिन्न तापीय परियोजनाओं की कई उत्पादन इकाइयां तकनीकी खराबी के कारण बंद होने से बिजली संकट गहरा गया है। हालात संभालने के लिए बिजली प्रबंधन को वैकल्पिक स्रोतों से महंगी दरों पर बिजली खरीदकर मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ रहा है।

दो अगस्त को अनपरा तापीय परियोजना की 210 मेगावाट क्षमता वाली तीसरी इकाई कंडेन्सर वैक्यूम कम होने तथा ओबरा तापीय परियोजना की 200 मेगावाट क्षमता वाली 13वीं इकाई कंडेन्सर ट्यूब लीकेज के कारण बंद हो गई।

इन दोनों इकाइयों के बंद होने से प्रदेश के कई जिलों में बिजली कटौती करनी पड़ी। इसी बीच पनकी तापीय परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई से भी उत्पादन ठप हो जाने से स्थिति और गंभीर हो गई। बिजली प्रबंधन ने तत्काल अतिरिक्त स्रोतों से महंगी बिजली खरीदकर प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल की।

साथ ही पनकी की बंद इकाई से करीब छह घंटे के भीतर पुनः उत्पादन शुरू करा दिया गया, जिससे कुछ राहत मिली। इसके बावजूद वर्तमान में प्रदेश की आठ सरकारी तथा एक निजी (आईपीपी) क्षेत्र की कुल नौ उत्पादन इकाइयों से बिजली उत्पादन बंद होने के कारण लगभग 3,845 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों में अनपरा की दो इकाइयों के अलावा हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा और घाटमपुर की एक-एक इकाई से उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

इन छह इकाइयों के चालू होते ही प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और महंगी दरों पर खरीदी जा रही बिजली पर निर्भरता कम होगी। इससे बिजली प्रबंधन पर आर्थिक दबाव भी घटने की उम्मीद है।

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