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    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 'पैबंद' रोक रहा रफ्तार, 45 किलोमीटर की दूरी में 40 जगह पैच

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 04:41 AM (IST)

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उन्नाव-लखनऊ खंड पर 45 किमी में 60 पैचवर्क किए गए हैं, पर नए पैच लगते ही पुराने उखड़ रहे हैं। सड़क की खराब गुणवत्ता के कारण ...और पढ़ें

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 'पैबंद' रोक रहा रफ्तार की राह।

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 'पैबंद' रोक रहा रफ्तार की राह।

    HighLights

    1. उन्नाव-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 45 किमी में 60 पैचवर्क।

    2. पैच सुखाने को लगाए गए पंखे, पुराने पैच उखड़े।

    3. सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, भारी वाहन प्रतिबंधित।

    जागरण संवाददाता, उन्नाव। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ के बीच 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में 60 जगह पैचवर्क किया जा चुका है। जल्दबाजी में पैच सुखाने के लिए पंखे लगाए गए हैं। हालत यह है कि नए पैच लगाए जा रहे हैं और पुराने उखड़ रहे हैं। कार की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है, लेकिन 30 से ऊपर जाते ही झटके महसूस होने लगते हैं।

    एनएचएआई ने सतर्कतावश गुरुवार से कोरारी टोल से एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से सेवानिवृत्त सहायक इंजीनियर एके शुक्ल कहते हैं कि पैचवर्क से काम नहीं चलेगा। पूरी सड़क उखाड़ी जाए, जांच हो और फिर नए सिरे से बनाई जाए तभी वास्तविक मजबूती आएगी।

    इस सड़क पर औसतन हर तीन किलोमीटर की दूरी पर बारिश का पानी ठहर जाता है। एक्सप्रेसवे पर 14 जुलाई से सफर शुरू हुआ था और 23 दिनों के अंदर यह स्थिति बन गई। उन्नाव से लखनऊ के बीच 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का निर्माण एनएचएआइ ने पीएनसी इन्फ्रा लिमिटेड कंपनी से कराया है।

    एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रति किमी औसतन 57 करोड़ रुपये लगे हैं। 17 जुलाई से अब तक कोई ऐसा दिन नहीं बीता, जब सड़क पर मशीनें व कर्मचारी काम करते न दिखे हों। 12 स्थानों पर सड़क धंस चुकी है।

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    उन्नाव से लखनऊ लेन पर 39 और उधर से वापस आने में 21 जगह पैचवर्क हैं। सबसे ज्यादा सड़क धंसने की समस्या उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन पर है। गुरुवार को चार जगह मरम्मत का काम चल रहा था।

    निर्माण एजेंसी पीएनसी बड़े-बड़े पैच लगाकर संतुष्ट हो रही है, लेकिन अब पुराने पैच खुलने लगे हैं। उनके आसपास नई सड़क धंस रही है। किलोमीटर संख्या 64, जहां पैच सुखाने के लिए 10 पंखे लगाए गए हैं, वहां 200 मीटर हिस्से शुक्रवार से खोले जाने व रूट डायवर्जन समाप्त किए जाने के दावे किए जा रहे हैं।

    इस बीच उन्नाव-लखनऊ लेन पर ही अन्य छह स्थानों पर सड़क कहीं 20 तो कहीं 100 मीटर तक उखड़ चुकी है, जिनमें बैरीकेड्स लगाकर मरम्मत की जा रही है। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ल के अनुसार केवल गड्ढों की पैचिंग पर्याप्त नहीं होगी है। पहले प्रभावित हिस्से की पूरी परत मिलिंग मशीन से हटाई जानी चाहिए।

    इसके बाद सबबेस और बेस लेयर की तकनीकी जांच कर जहां भी नमी, धंसाव या कमजोरी मिले, उस हिस्से का पुनर्निर्माण होना चाहिए। सड़क के दोनों ओर ड्रेनेज और शोल्डर को भी मजबूत किया जाए, ताकि वर्षा का पानी सड़क की परतों में प्रवेश न कर सके।

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