सजा से बचने के लिए दुष्कर्म के आरोपी ने हाईकोर्ट में पेश किया पीड़िता का फर्जी समझौता पत्र, वकील पर भी मुकदमा
फतेहपुर चौरासी की दुष्कर्म पीड़िता के नाम पर आरोपी ने सजा से बचने के लिए हाईकोर्ट में फर्जी समझौता पत्र दाखिल किया। उच्च न्यायालय के निर्देश पर हुई पु ...और पढ़ें

HighLights
दुष्कर्म आरोपी ने हाईकोर्ट में फर्जी समझौता पत्र पेश किया।
पीड़िता के फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार किए गए।
पुलिस जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि, तीन पर केस।
जागरण संवाददाता, उन्नाव। न्याय की आस में न्यायालय पर टकटकी लगाए बैठी दुष्कर्म पीड़िता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिन आरोपितों ने उसकी जिंदगी बर्बाद की वह न्यायालय को भी मजाक बना देंगे। सजा होने के डर से आरोपितों ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ लखनऊ के एक अधिवक्ता के साथ मिलकर दुष्कर्म पीड़िता का फर्जी समझौता व शपथ पत्र उसके दस्तखत के साथ बनाकर दाखिल कर दिया।
पीड़िता को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने किसी तरह के समझौते से इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस की जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। इस पर दुष्कर्म के आरोपित उसके साथी व अधिवक्ता पर लखनऊ के विभूतिखंड थाना में मुकदमा दर्ज किया गया है।
फतेहपुर चौरासी थाना के तत्कालीन दारोगा सतीश चंद्र द्विवेदी ने बताया कि मूल रूप से फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के एक गांव व मौजूदा समय में हरदोई के बिलग्राम क्षेत्र स्थित ससुराल में रहने वाली महिला ने वर्ष 2022 में थाना फतेहपुर चौरासी में रामबाबू के विरुद्ध दुष्कर्म, मारपीट और धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। मामला उन्नाव की न्यायालय में विचाराधीन है।
रामबाबू को डर था कि उसे सजा हो जाएगी। सजा से बचने के लिए उसने सहयोगी खुशीराम और उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता सुरेश कुमार यादव के साथ मिलकर पूरे मामले को खत्म करने का षड़यंत्र रचा। सभी ने दुष्कर्म पीड़िता का एक कूटरचित समझौता व शपथ पत्र तैयार कर उच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया।
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न्यायालय में दाखिल समझौता पत्र पर 15 दिसंबर 2025 की तिथि अंकित थी, जबकि स्टांप 24 फरवरी 2026 को खरीदे गए थे। दुष्कर्म पीड़िता को जब इसकी भनक लगी तो उसने उच्च न्यायालय को किसी प्रकार का समझौता व शपथ पत्र दाखिल न करने की जानकारी दी।
दुष्कर्म पीड़िता के अनुसार, 11 मई 2026 को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उसे फर्जी शपथ व समझौता पत्र दाखिल किए जाने की जानकारी हुई। उसने उच्च न्यायालय से जांच करा कार्रवाई की मांग की।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ लखनऊ ने 11 मई 2026 को एसपी जयप्रकाश सिंह को जांच के निर्देश दिए। एसपी ने 31 मई 2026 को एएसपी दक्षिणी शैलेंद्र लाल को जांच सौंपी। जांच में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर लाभ लेने का प्रयास किया। इसी रिपोर्ट के आधार पर 25 जुलाई 2026 को विभूतिखंड थाने में रामबाबू निवासी रंधीरखेड़ा, थाना फतेहपुर चौरासी, खुशीराम निवासी रंधीरखेड़ा व अधिवक्ता सुरेश कुमार यादव विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।
एएसपी दक्षिणी शैलेंद्र लाल ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जांच की, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पुष्टि हुई। जिसके आधार पर लखनऊ के विभूतिखंड थाना में आरोपितों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।जांच वहीं से होगी।