मुख्यमंत्री योगी के लोगों को न्याय दिलाने के प्रयास को विफल कर रही है प्रशासनिक मशीनरी, उठी मांग - 'नोटिस नहीं कार्रवाई हो'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों के बावजूद वाराणसी में प्रशासनिक मशीनरी जनता की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने में विफल रही है। जुलाई म ...और पढ़ें

वाराणसी में जनता की शिकायतों का अंबार, प्रशासनिक लापरवाही से सीएम योगी के प्रयास विफल। (फाइल फोटो)
अशोक सिंह, जागरण, वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि लोगों को घर बैठे समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो। इसके लिए समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) लागू की गई है। इसमें कई स्तर पर मानिटरिंग, आवेदक से फीडबैक लेने, मौके पर जाकर निस्तारण की व्यवस्था है।
इसके बावजूद जनता को न्याय नहीं मिल रहा है। इसका प्रमाण है कि शिकायतों के निस्तारण में जुलाई माह में प्रदेश में वाराणसी का स्थान 62वां रहा। लोग एक ही समस्या को 28 बार शिकायत कर रहे हैं। पूरी निस्तारण प्रक्रिया का परिणाम बताता है कि प्रशासनिक मशीनरी मुख्यमंत्री के प्रयास को फेल करने में लगे हैं।
जिले का यह खराब हाल तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में आइजीआरएस है। वह प्रति माह काशी आते हैं। आइजीआरएस की समीक्षा करते हैं। जिले में एडीएम स्तर का एक अधिकारी मानिटरिंग करता है। जिलाधिकारी ने कई विभागों को नोटिस देकर जवाब-तलब किया। जुलाई माह में सदर तहसीलदार से संबंधित शिकायतों में 144 में आवेदक असंतुष्ट रहे।
68 में आवेदक से संपर्क ही नहीं किया गया। नगर निगम से संबंधित 264 प्रकरण में नागरिकों ने असंतुष्ट फीडबैक दिए। 91 मामलों में आवेदक से संपर्क ही नहीं किया गया। बिजली विभाग से संबंधित शिकायतों में 165 प्रकरण में शिकायतकर्ता असंतुष्ट रहे और 68 मामलों में आवेदक से संपर्क ही नहीं किया गया। मौके पर समाधान के लिए बने संपूर्ण समाधान दिवस में जहां पूरी प्रशासनिक मशीनरी रहती है वहां मात्र पांच-10 का निस्तारण होता है।
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इसी मनमाने ढंग से शिकायतों के कागज पर निस्तारण के कारण आम आदमी एसडीएम, डीएम, कमिश्नर, संपूर्ण समाधान दिवस, समाधान दिवस, प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय, मंत्रियों और विधायकों के कार्यालय, रोहनियां स्थित भाजपा का क्षेत्रीय कार्यालय, कमिश्नर, प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव से लगायत मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय आदि तक से गुहार लगा रहा है। लापरवाही करने वालों को केवल जवाब-तलब के कारण कोई निस्तारण को जिम्मेदारी से नहीं करता। जिलाधिकारी स्वयं प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में केवल ''शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने'' का संदेश देते हैं।
निस्तारण का मनमाना तरीका
-मौके पर गए बिना निस्तारण की रिपोर्ट।
- फोन पर शिकायतकर्ता से फीडबैक नहीं लेना।
-जिसकी शिकायत उसी को जांच सौंपना।
-जानबूझकर शिकायत को आनलाइन नहीं करना।
-शिकायत कुछ निस्तारण रिपोर्ट दूसरी देना।
-शिकायती पत्र जांच के लिए संबंधित अधिकारी की बजाय किसी और को भेज देना।
-जो काम अधिकारी का उसे बाबू या लेखपाल को सौंप देना।
-शुल्क जमा करने और अधिकारी के आदेश के बाद पैमाइश नहीं करना।
-मौके पर गए भी तो आवेदक को नहीं बुलाना।
-जिसने शिकायत किया उसी के खिलाफ जांच शुरू कर देना।
डीएम कार्यालय में प्रतिदिन शिकायत--20--50
प्रतिमाह शिकायत--800--1000
संपूर्ण समाधान दिवस --175 -- 300
प्रतिमाह आनलाइन लगभग--3000
केस--1--पिंडरा के थाना-रामपुर में नलकूप की बोरिंग दो वर्ष बाद भी चालू करने का 28वीं बार शिकायत हुई। डीएम ने जल निगम के अधिशासी अभियंता को तलब तो किया लेकिन कार्रवाई की बजाय फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट मांगा।
केस-2-पिंडरा तहसील में मुसहर समुदाय के पचरासी और जगदीशपुर गांव के 25 से अधिक लोगों ने भूमि और घरौनी की मांग का प्रार्थना पत्र एक वर्ष में चार बार दिया।
केस--3--सदर तहसील में बरियासनपुर चौबेपुर निवासी किसान महेंद्र प्रसाद सिंह ने आठ बार शिकायत किए कि पड़ोसी मेरी दो विश्वास जमीन पर से कब्जा नहीं हटा रहे हैं।
केस--4--सदर तहसील बखरिया थाना लोहता निवासी अनुराग सिंह ने गांव के सार्वजनिक तालाब पर से अवैध कब्जा हटाने की 10 बार शिकायत कर चुके हैं।
केस--5--एसडीएम राजातालाब से चौखंडी की मीना मौर्य ने चार बार शिकायत की कि उनकी भूमि शामिल खाते में है। बिना बंटवारा किये कानूनगो ने कुछ लोगों को सीमांकन कर दिया। उसकी भूमि जो 12 विश्वा थी अब मात्र दो विश्वा शेष रह गई है।
- लोगों की शिकायत का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं करना और मनमाने ढंग से रिपोर्ट देने की बात बहुत गंभीर है। जनता को बार-बार गुहार लगाना चिंतनीय है। मुझे कुछ मामले बताएं मैं इस बात को ऊपर तक पहुंचाउंगा। -प्रदीप अग्रहरि- अध्यक्ष, भाजपा महानगर।
- हम लोगों तक जो समस्याएं आती हैं उसे अधिकारियों तक पहुंचाते हैं लेकिन जनता 10-20 बार शिकायत कर रही है तो यह ठीक नहीं। ऐसे अधिकारियों को नोटिस नहीं कार्रवाई होनी चाहिए। इस हालात को मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। -अशोक चौरसिया-अध्यक्ष, भाजपा काशी क्षेत्र।