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    पंजाब, राजस्थान के कुछ क्षेत्रों को छोड़ कहीं भी होलाष्टक में शुभ कार्य वर्जित नहीं, जान लें होलाष्‍टक की मान्‍यता

    By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
    Updated: Sat, 21 Feb 2026 12:02 PM (IST)

    इंटरनेट मीडिया पर होलाष्टक को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक शुभ कार्यों पर प् ...और पढ़ें

    होलाष्टक में शुभ कार्यों पर प्रतिबंध की भ्रांतियाँ दूर हुईं, जानें किन क्षेत्रों में लागू।

    होलाष्टक में शुभ कार्यों पर प्रतिबंध की भ्रांतियाँ दूर हुईं, जानें किन क्षेत्रों में लागू।

    HighLights

    1. होलाष्टक पर इंटरनेट मीडिया की भ्रांतियाँ निराधार।

    2. शुभ कार्य प्रतिबंध पंजाब-राजस्थान के कुछ क्षेत्रों तक सीमित।

    3. ज्योतिष विशेषज्ञ ने दी सही जानकारी, भयमुक्त रहें।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। पिछले कुछ वर्षों से इंटरनेट मीडिया पर होलाष्टक को लेकर कई भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक शुभ कार्यों को वर्जित बताने का प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है। पंजाब और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर, होलाष्टक में शुभ कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

    शास्त्रों के अनुसार, विपाशा (व्यास), इरावती, शतद्रु (सतलज) नदियों के तीरवर्ती देशों तथा त्रिपुष्कर देश (जैसे अजमेर) में होलिकाष्टक दोष लागू होता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (होलिका दहन की तिथि) से पहले के आठ दिन, अर्थात फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक, विवाह, वधू प्रवेश, द्विरागमन, गृहारंभ, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।

    ये नदियाँ पंजाब प्रांत की हैं। इनमें व्यास, रावी और सतलज जैसी नदियों के समीप के धवलपुर, लुधियाना, शिमला, फिरोजपुर, गुरुदासपुर, होशियारपुर, कांगड़ा, कपूरथला आदि नगरों में होलि‍काष्टक दोष की मान्यता है और यहाँ प्रायः विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

    काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय बताते हैं कि इस बार होलाष्टक 23 फरवरी से आरंभ हो रहा है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कोई भी कालखंड या दिन अशुभ नहीं होता। किसी स्थान या कार्यविशेष से संबंधित होकर कालखंड की शुभता या अशुभता निर्धारित होती है, जिसे सामान्य भाषा में मुहूर्त कहा जाता है। इस संदर्भ में होलाष्टक भी सार्वदेशिक नहीं है, बल्कि यह कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए शुभ कार्यों हेतु शास्त्रों में वर्जित है।

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    यह स्पष्ट है कि होलाष्टक के संबंध में फैली भ्रांतियाँ निराधार हैं। समाज को चाहिए कि वे इस विषय में सही जानकारी प्राप्त करें और बिना किसी भय के अपने शुभ कार्यों को संपन्न करें। इस संदर्भ में स्थानीय परंपराओं और शास्त्रों का सम्मान करते हुए, हमें अपने कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों को लेकर जो भ्रांतियाँ फैली हैं, उन्हें दूर करने की आवश्यकता है ताकि लोग सही जानकारी के आधार पर अपने निर्णय ले सकें।