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    चैत्र नवरात्र 19 मार्च से और श्रीराम नवमी 27 को, काशी के ज्‍योत‍िषाचार्यों ने बताया कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त

    By shailesh asthanaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Mon, 09 Mar 2026 04:33 PM (GMT+05:30)

    Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को श्रीराम नवमी के साथ समाप्त होगा। काशी के ज्योतिषियों के अनुसार, 19 मार्च को कल ...और पढ़ें

    काशी में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और श्रीराम नवमी की तिथि।

    काशी में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और श्रीराम नवमी की तिथि।

    HighLights

    1. चैत्र नवरात्र 19 मार्च से, श्रीराम नवमी 27 मार्च को।

    2. कलश स्थापना 19 मार्च को दोपहर 12:25 बजे तक शुभ।

    3. माता का आगमन पालकी पर, प्रस्थान गज पर होगा।

    शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक आदिशक्ति की आराधना, उपासना व साधनाा, सिद्धियों का महापर्व वासंतिक नवरात्र पर्व 19 मार्च गुरुवार से आरंभ होगा। उस दिन उदयातिथि में चैत्र कृष्ण अमावस्या होने के कारण प्रतिपदा का क्षय होते हुए भी पूरे दिन प्रतिपदा मिलने से घर-घर मेें कलश स्थापना होगी तथा देवी शक्ति की आराधना का यह महापर्व पूर्ण नौ दिवसीय होगा। श्रीराम नवमी 27 मार्च को होगी, उसी दिन व्रत की पूर्णाहुति के साथ भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव सनातन धर्मावलंबी मनाएंगे।

    काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष, श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 6:41 बजे तक रहेगी। इसके बाद ही प्रतिपदा लग जाएगी जो 20 मार्च को प्रातः सूर्योदय के पूर्व ही 5:30 बजे तक पूर्ण हो जाएगी।

    इसलिए उदयातिथि में अमावस्या रहते हुए भी पूर्ण दिन प्रतिपदा का मान व्याप्त होने के कारण वासंतिक नवरात्र व्रत का आरंभ 19 मार्च से ही होगा तथा इसी दिन भगवती के पूजन के निमित्त घरों/ मंदिरों में कलश स्थापन पूजन इत्यादि किया जाएगा तथा हवन पूजन के साथ पूर्णाहुति 27 मार्च को मध्याह्न 12:27 तक किया जा सकेगा। देवी के नौ स्वरूपों का दर्शन उन्नीस मार्च से आरंभ होकर 27 तक प्रतिदिन नौ दिनों में क्रमशः किया जाएगा।

    प्रात:काल से दोपहर 12:25 बजे तक की जा सकेगी कलश स्थापना
    प्रो. पांडेय ने बताया कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग न होने के कारण प्रातःकाल से आरंभ कर दोपहर 12:25 तक कलश स्थापन शुभ होगा। किसी कारणवश जो लोग उक्त काल में कलश स्थापन न कर सकें वे उसके बाद भी रात्रि पर्यंत कलश स्थापन कर सकते हैं।

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    चैत्र छठ व्रत विधान 24 को

    बीएचयू के ही प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि वासंतिक नवरात्र की अवधि में पड़ने वाले चैत्र छठ व्रत का संधान करने वाली माताएं 24 मार्च को सूर्यषष्ठी व्रत करेंगी तथा 25 को प्रातः काल सूर्यार्घ्य देने के पश्चात पारणा करेंगीं। उन्होंने बताया कि महानिशा पूजा 25 की रात्रि में संपन्न होगी तथा अन्नपूर्णा परिक्रमा 25 मार्च को ही सायं 4:54 से आरंभ कर 26 को अपराह्न 2:32 तक होगी। महाअष्टमी व्रत 26 मार्च गुरुवार को किया जाएगा और पारण 27 को होगा।

    महानवमी का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा तथा पारण 28 को प्रातः 10:30 तक हो सकेगा पाठ तथा हवन की पूर्णाहुति 27 मार्च 2026 को मध्यान्ह 12:30 तक नौमी तिथि में ही कर लेनी हाेगी। चढ़ती-उतरती का व्रत रखने वाले अष्टमी तिथि में 26 मार्च को उतरती का व्रत करेंगे तथा पारण नवमी तिथि में 27 मार्च को करेंगे। संपूर्ण नवरात्रपर्यंत व्रत करने वाले श्रद्धालु गण भी 27 मार्च को मध्याह्न 12:30 के उपरांत या 28 मार्च को प्रातः दशमी पर्यंत पारण कर सकेंगे। इसी बीच 26 मार्च की रात्रि में बसियौड़ा पूजन भी होगा।

    पालकी पर आएंगी माता, गज से करेंगी प्रस्थान
    ज्योतिर्विद आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार माताजी का आगमन पालकी पर होगा, ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से इसे शुभ नहीं माना जाता किंतु मां की साधना अशुभ को भी शुभ बनाने वाली है। मां गज वाहन से प्रस्थान करेंगी जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।