उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाएगा हिंदू नववर्ष, विक्रम संवत 2083 का होगा शुभारंभ
वाराणसी में वासंतिक नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसमें घर-घर कलश स्थापना होगी। उदयातिथि में अमावस्या के बावजूद प्रतिपदा का मान रहेगा, जिससे नौ ...और पढ़ें

वाराणसी में वासंतिक नवरात्र 19 मार्च से, हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ।
HighLights
19 मार्च से वासंतिक नवरात्र और हिंदू नववर्ष शुरू।
अमावस्या में भी 19 मार्च को होगी कलश स्थापना।
27 मार्च को धूमधाम से मनाई जाएगी श्रीरामनवमी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। ऋतुओं के संधिकाल मेें मां आदिशक्ति की आराधना, साधना, उपासना और व्रत कर शक्ति संचयन करने का महापर्व वासंतिक नवरात्र 19 मार्च से आरंभ हो रहा है। इस बार उदयातिथि में अमावस्या होने के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय है। हालांकि सूर्योदय के कुछ देर पश्चात ही प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी फिर भी भारतीय कालगणना पद्धति के अनुसार पूरे दिन प्रतिपदा होने के बाद भी अमावस्या तिथि ही मानी जाएगी।
इस प्रकार इस बार अमावस्या तिथि में उपस्थित प्रतिपदा में ही घर-घर में कलश स्थापना होगी। इसके साथ ही नौ दिवसीय व्रत, अनुष्ठान आरंभ हो जाएंगे। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाला हिंदू नववर्ष भी इसी तरह पिछले संवत्सर की अमावस्या में आरंभ होगा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि प्रतिपदा का क्षय होने के बाद भी नवरात्र पूरे नौ दिनों का है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 19 मार्च गुरुवार को प्रातः 6:41 बजे तक है। इसके पश्चात प्रतिपदा लग जा रही है जो 20 मार्च को प्रातः सूर्योदय के पूर्व ही 5:30 बजे तक रहेगी। इसलिए उदयातिथि में अमावस्या रहते हुए भी पूरे दिन प्रतिपदा का मान व्याप्त रहेगा। इसलिए वासंतिक नवरात्र व्रत का आरंभ 19 मार्च से ही होगा तथा हवन पूजन के साथ पूर्णाहुति 27 मार्च को मध्याह्न 12:27 तक किया जा सकेगा। देवी के नौ स्वरूपों का दर्शन 19 मार्च से आरंभ 27 मार्च तक प्रतिदिन नौ दिनों में क्रमशः किया जाएगा।
दोपहर तक की जा सकेगी कलश स्थापना
बीएचयू ज्योतिष विभाग के ही आचार्य प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग न होने के कारण प्रातः काल से आरंभ कर दोपहर 12:25 तक कलश स्थापन शुभ होगा। किसी कारणवश जो लोग उक्त काल में कलश स्थापन न कर सकें वे उसके बाद भी रात्रिपर्यंत कलश स्थापन कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि इसी बीच चैत्र छठ करने वाली माताएं चौबीस मार्च को सूर्यषष्ठी व्रत करेंगी तथा 25 को प्रातः काल सूर्यार्घ्य देने के पश्चात पारणा करेंगी। उन्होंने बताया कि महानिशा पूजा 25 की रात्रि में की जाएगी तथा उसी दिन काशी में अन्नपूर्णा परिक्रमा सायं 4:54 से आरंभ होकर 26 को अपराह्न 2:32 तक किया जाएगा।
ज्योतिर्विद पं. ऋषि द्विवेदी बताते हैं कि केवल प्रथम और अंतिम व्रत करने वाले साधक अंतिम नवरात्र का व्रत महाअष्टमी तिथि में 26 मार्च गुरुवार को करेंगे और 27 मार्च को पारण करेंगे। जबकि महानवमी का व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा पाठ तथा हवन की पूर्णाहुति उसी दिन दाेपहर में 12:30 बजे तक कर लेना होगा। व्रत का पारण अगले दिन 28 की प्रातः 10:30 तक किया जा सकेगा।
27 को मनेगी श्रीरामनवमी
प्रो. पांडेय ने बताया कि 27 मार्च को ही पूरे देश में श्रीरामनवमी का उत्सव मनाया जाएगा। मध्याह्न 12 बजे मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई जाएंगी, प्रभु की आरती होगी, घरों में मंगलाचार, सोहर होंगे और प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव में सनातन धर्मावलंबी डूब जाएंगे।
चैत्र नवरा: प्रमुख तिथियां एवं मुहूर्त
घट स्थापना : 19 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 6:42 बजे से मध्याह्न 12:25 बजे तक
सूर्य षष्ठी व्रत : 24 मार्च से आरंभ, 25 मार्च की प्रात: सूर्यार्घ्य पश्चात पारण
महानिशा पूजा : महासप्तमी में 25 मार्च की रात्रि
अन्नपूर्णा परिक्रमा : 25 मार्च की सायं 4:54 से 26 मार्च को अपराह्न 2:32 बजे तक
महाष्टमी व्रत : 26 मार्च से आरंभ, 27 मार्च को पारण
महानवमी व्रत : 27 मार्च संपूर्ण दिवस
पाठ-अनुष्ठान पूर्णाहुति : 27 मार्च, दोपहर 12:30 बजे तक
नवरात्र व्रत पारण : 27 मार्च की दोपहर बाद से 28 की प्रात: 10:30 बजे तक