Mauni Amavasya 2026 : काशी के ज्योतिषाचार्यों ने बताया - "काशी–प्रयागराज न जा सकें तो घर में मौन स्नान करें, मिलेगा समान पुण्य"
माघ माह की मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाई जाएगी, जिसमें मौन स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि काशी या प्रयागराज में स्नान से आध्यात्मिक ऊर्जा मिल ...और पढ़ें

मौनी अमावस्या का दिन आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण है।
HighLights
मौनी अमावस्या पर मौन स्नान का विशेष विधान है।
काशी या प्रयागराज में स्नान से आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।
घर पर स्नान से भी समान पुण्य प्राप्त होता है।
शैलेश अस्थाना, जागरण, वाराणसी। माघ माह के पवित्र स्नान-दान पर्व का तीसरा प्रमुख स्नान मौनी अमावस्या को किया जाता है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर काशी के दशाश्वमेध घाट या प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में मौन स्नान करने से मन, प्राण और शरीर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह महास्नान देव, योगी-संन्यासी और गृहस्थ सभी के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, इस वर्ष मौनी अमावस्या तिथि 17 जनवरी शनिवार रात 11:55 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी रविवार रात 1:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में 18 जनवरी की सुबह से पूरे दिन स्नान का विधान है। शास्त्रों में बताया गया है कि कोई श्रद्धालु किसी कारणवश काशी या प्रयागराज नहीं जा पाता तो वह आसपास के किसी तालाब, सरोवर, कुएं या नदी में काशी और प्रयागराज का स्मरण करते हुए मौन होकर स्नान कर सकता है। ऐसा करने पर भी उतना ही पुण्य फल प्राप्त होता है।
मौनी अमावस्या का पर्व विशेष रूप से ध्यान और साधना का अवसर प्रदान करता है। इस दिन श्रद्धालु मौन रहकर अपने मन और आत्मा की शुद्धि के लिए स्नान करते हैं। यह दिन आत्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मौन रहकर स्नान करने से व्यक्ति अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत कर सकता है और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकता है।
इस दिन का महत्व केवल स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन दान-पुण्य का भी है। श्रद्धालु इस दिन अपने सामर्थ्यानुसार दान करते हैं, जिससे उन्हें और अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या पर स्नान और दान का महत्व इस बात से भी स्पष्ट होता है कि इसे सभी वर्गों के लिए पुण्यदायी माना गया है।
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इस अवसर पर, यदि कोई व्यक्ति काशी या प्रयागराज नहीं जा पाता है, तो उसे निराश होने की आवश्यकता नहीं है। वह अपने घर के निकट स्थित जलाशय में जाकर भी इस पवित्र स्नान का लाभ उठा सकता है। इस प्रकार, मौनी अमावस्या का पर्व सभी के लिए एक समान अवसर प्रदान करता है, जिससे वे अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध कर सकें।
मौनी अमावस्या का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन का भी साधन है। सभी श्रद्धालुओं से अपील है कि वे इस दिन का लाभ उठाएं और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।