10वीं के बाद ही आयुर्वेद चिकित्सक बनने का मौका, इस तरह मिलेगा प्रवेश का मौका
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय 'आयुर्वेद गुरुकुलम' शुरू कर रहा है, जिससे छात्र 10वीं के बाद संस्कृत माध्यम से सीधे बीएएमएस कर सकेंगे। ...और पढ़ें

10वीं के बाद आयुर्वेद चिकित्सक बनें: संस्कृत विश्वविद्यालय का नया गुरुकुलम कार्यक्रम।
HighLights
10वीं के बाद संस्कृत माध्यम से सीधे बीएएमएस की पढ़ाई।
7.5 वर्षीय एकीकृत आयुर्वेद पाठ्यक्रम, प्रवेश परीक्षा से दाखिला।
आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा से जोड़ने का वैज्ञानिक प्रयास।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू), नई दिल्ली ‘आयुर्वेद गुरुकुलम’ की शुरुआत करने जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत संस्कृत माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र 10वीं के बाद सीधे आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं सर्जरी (बीएएमएस) की पढ़ाई कर सकेंगे। इस पाठ्यक्रम में 7.5 वर्ष का एकीकृत आयुर्वेद पाठ्यक्रम शामिल होगा, जिसमें दो वर्ष का प्री-आयुर्वेद कार्यक्रम, 4.5 वर्ष का बीएएमएस कोर्स और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है।
वाराणसी स्थित आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में प्रोफेसर रहे और आयुष मंत्रालय के सदस्य डा. के.के. द्विवेदी ने बताया कि इस पाठ्यक्रम की शुरुआत इसी शैक्षणिक सत्र से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में की जाएगी। छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी, जो ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट फार प्री-आयुर्वेद प्रोग्राम’ के तहत आयोजित की जाएगी।
इस प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित की गई हैऔर छात्रों को परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि अन्य संस्कृत शिक्षण संस्थान या विश्वविद्यालय इस कोर्स को शुरू करना चाहेंगे, तो उन्हें सीएसयू से संबद्धता लेनी होगी। प्रारंभ में एक संस्थान में 50 सीटें होंगी, जिन्हें बाद में संसाधनों के आधार पर बढ़ाकर 120 तक किया जा सकता है।
इस पहल का उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में छात्रों को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शिक्षा प्रदान करना है। आयुर्वेद, जो कि एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, को आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वयित करने का प्रयास किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों को न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा की गहरी समझ देगा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करेगा, जिससे वे भविष्य में एक कुशल चिकित्सक बन सकें।
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आयुर्वेद गुरुकुलम की इस पहल से छात्रों को आयुर्वेद के क्षेत्र में करियर बनाने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए बल्कि समाज के लिए भी लाभकारी होगा, क्योंकि इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का यह कदम आयुर्वेद के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगा और छात्रों को एक समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर करेगा। इस प्रकार, आयुर्वेदिक चिकित्सा में करियर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो छात्रों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा।