वाराणसी नगर निगम की साख पर पीडब्ल्यूडी की नाकामी का 'कीचड़', बरसात में धुल गई चमक
पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से चितईपुर मार्ग पर बने गड्ढे और कीचड़ वाराणसी नगर निगम की छवि खराब कर रहे हैं, जिससे राहगीर चोटिल हो रहे हैं। महापौर अशोक कुम ...और पढ़ें

वाराणसी में पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से नगर निगम की साख पर कीचड़, महापौर ने दिए सख्त निर्देश।
HighLights
पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से चितईपुर मार्ग पर गड्ढे।
महापौर ने लापरवाह अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाई।
तुरंत गड्ढे भरकर आवागमन सुगम बनाने के निर्देश।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की लापरवाही के कारण चितईपुर मार्ग पर उत्पन्न 'कीचड़' अब नगर निगम की छवि को धूमिल कर रहा है। सड़क पर जगह-जगह खोदे गए गहरे गड्ढे और उनमें जमा बरसाती पानी के कारण राहगीरों को प्रतिदिन चोटिल होना पड़ रहा है।
जबकि सड़क पीडब्ल्यूडी की है, लेकिन जनता का आक्रोश नगर निगम पर निकल रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए महापौर अशोक कुमार तिवारी ने शुक्रवार को प्रशासनिक टीम के साथ मौके का दौरा किया और लापरवाह अभियंताओं को कड़ी फटकार लगाई।
महापौर और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को सख्त निर्देश दिए कि वे तुरंत सभी गड्ढों को भरकर आवागमन को सुगम बनाएं। महापौर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कार्य में कोई ढिलाई बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की शिकायत शासन को की जाएगी।
इस निरीक्षण में क्षेत्रीय पार्षद मदन मोहन तिवारी, गोपाल जी, सुरेश पटेल, नामित पार्षद कमलेश पाल, पार्षद प्रतिनिधि अतुल पांडेय, विनीत सिंह और अजय बिंद भी उपस्थित रहे। प्रशासनिक पक्ष से अधिशासी अभियंता (पीडब्ल्यूडी) आशुतोष सिंह, नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता (जलकल) सौरभ सिंह सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद थे।
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इस स्थिति ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पीडब्ल्यूडी की ओर से किए गए कार्यों की गुणवत्ता और समय पर मरम्मत न होने के कारण जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महापौर ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जल्द से जल्द आवश्यक सुधार करें ताकि जनता को राहत मिल सके।
इस प्रकार की लापरवाही से न केवल जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि नगर निगम की साख भी दांव पर लगी हुई है। महापौर का यह कदम निश्चित रूप से पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराने में सहायक होगा। अब देखना यह है कि क्या पीडब्ल्यूडी अपने कार्यों में सुधार लाएगा या फिर नगर निगम को और भी अधिक आलोचना का सामना करना पड़ेगा।