बीएचयू के आईसीएबी सम्मेलन में हिमालयन जीन एक्सपर्ट का शोध, हिमालय के लोगों का आनुवंशिक संबंध साइबेरिया तक
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आईसीएबी-2026 सम्मेलन में डॉ. राकेश तमांग ने हिमालयी लोगों के डीएनए अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। शोध के अनुसार, हिमालय ...और पढ़ें

बीएचयू सम्मेलन में खुलासा: हिमालयी लोगों का डीएनए तिब्बत और साइबेरिया से जुड़ा।
HighLights
हिमालयी लोगों का तिब्बत और साइबेरिया से मजबूत आनुवंशिक संबंध।
हार्ट अटैक से संबंधित जीन हिमालयवासियों में नगण्य पाया गया।
दूध पचाने वाले जीन यूरोपीय लोगों से पूरी तरह भिन्न हैं।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीएबी-2026 के दूसरे दिन, कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिमालयन जीन एक्सपर्ट डाक्टर राकेश तमांग ने हिमालय क्षेत्र के लोगों के डीएनए अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि हिमालय के लोगों का सबसे मजबूत आनुवंशिक संबंध तिब्बत और साइबेरिया से है, जबकि चीन से आनुवंशिक संबंध अपेक्षाकृत कमजोर है।
डाक्टर राकेश तमांग ने अपने आमंत्रित व्याख्यान में कहा कि हिमालय क्षेत्र में पौधों और जानवरों की जैव-विविधता अत्यधिक है, लेकिन मानव आनुवंशिक विविधता पर अब तक ज्यादा शोध नहीं हुआ था। हिमालय में 100 से अधिक एथनिक समूह निवास करते हैं, जिनमें शेरपा, भूटिया, लेपचा, गद्दी और भोटिया शामिल हैं।
पिछले पां वर्षों में, डाक्टर तमांग ने हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों से 1000 से अधिक डीएनए सैंपल एकत्र किए। इन सैंपलों का विस्तृत जेनेटिक विश्लेषण डीएनए सीक्वेंसिंग द्वारा किया गया है। उन्होंने बताया कि हिमालय के लोगों का जीन तिब्बत और साइबेरिया के लोगों से जुड़ा हुआ है। डाक्टर तमांग ने कहा कि हिमालय न केवल भौगोलिक रूप से विविध है, बल्कि आनुवंशिक रूप से भी एक 'मेल्टिंग पॉट' रहा है, जहां प्राचीन प्रवासियों के जीन आज भी जीवित हैं।
इसके अतिरिक्त, डाक्टर तमांग ने यह भी बताया कि दक्षिण एशिया में हार्ट अटैक के प्रमुख कारण एमवाईबीपीसी3 जीन हिमालय के लोगों में नगण्य मात्रा में पाया जाता है, जिससे हिमालयवासियों में इस जीन से संबंधित हृदयाघात का जोखिम बहुत कम है। यह जानकारी स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है और हिमालय के लोगों की आनुवंशिक संरचना को समझने में सहायक है।
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एक और महत्वपूर्ण खुलासा यह रहा कि हिमालय के लोगों में दूध पचाने (लैक्टेज पर्सिस्टेंस) से संबंधित जीन यूरोपीय लोगों के जीन से पूरी तरह अलग है। यहां मुख्यतः एशियाई-विशिष्ट वेरिएंट पाए गए, जो दर्शाते हैं कि हिमालयी समूहों का डेयरी फार्मिंग और पशुपालन का इतिहास अलग विकसित हुआ है।
डाक्टर तमांग ने कहा, “यह अध्ययन हिमालय को केवल जैव-विविधता का खजाना ही नहीं, बल्कि मानव प्रवासन और आनुवंशिक इतिहास का भी महत्वपूर्ण केंद्र साबित करता है।” इस प्रकार, हिमालय क्षेत्र की आनुवंशिक विविधता पर यह शोध न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानवता के इतिहास को समझने में भी सहायक है।