पीएम नरेन्द्र मोदी से मिले चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह, थियोसोफिकल सोसायटी की संपत्तियों की सुरक्षा की मांग
Chandauli MP Met PM Modi: सांसद ने देश भर की ऐसी दान संपत्तियों का सर्वेक्षण कराकर अवैध कब्जों से सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। चंदौली और प्रदेश के ...और पढ़ें

चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की
HighLights
सांसद ने संपत्तियों की सुरक्षा की मांग और किसानों के मुआवजे को सौंपा प्रत्यावेदन
संस्था की संपत्तियों का हो रहा दुरुपयोग और दयाल ग्रुप के पक्ष में निर्णय का विरोध
सांसद का आरोप, को लीज पर देकर कराया जा रहा होटल का निर्माण कराए जाने का आरोप लगाया
जागरण संवाददात, चंदौली। लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर दो महत्वपूर्ण जनहित के विषयों पर प्रत्यावेदन सौंपा। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए उच्चस्तरीय परीक्षण और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
समाजवादी पार्टी से सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताया कि कमच्छा क्षेत्र में द इंडियन सेक्शन आफ द थियोसोफिकल सोसायटी (मुख्यालय) की स्थापना वर्ष 1903 में डॉ. एनी बेसेंट ने की थी। संस्था को शिक्षा और समाजसेवा के लिए देश भर में हजारों एकड़ भूमि दान में मिली थी।
आरोप है कि संस्था की संपत्तियों का दुरुपयोग हो रहा है और इसकी भूमि का एक हिस्सा दयाल ग्रुप को लीज पर देकर होटल का निर्माण कराया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। इसके अलावा, बिहार के छपरा स्थित थियोसोफिकल लाज से जुड़ी अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया।
सांसद ने देश भर की ऐसी दान संपत्तियों का सर्वेक्षण कराकर अवैध कब्जों से सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। चंदौली और प्रदेश के किसानों की भूमि अधिग्रहण से जुड़ी विसंगतियों को भी प्रमुखता से उठाया गया। सांसद ने कहा कि पिछले लगभग 15 वर्षों से सर्किल रेट में अपेक्षित वृद्धि न होने के कारण किसानों को बाजार मूल्य से बहुत कम मुआवजा मिल रहा है।
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उन्होंने देश के अन्य राज्यों (विशेषकर दक्षिण भारत) और उत्तर प्रदेश के मुआवजे में भारी अंतर का हवाला देते हुए चंदौली समेत पूरे यूपी में भूमि अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ाकर कम से कम 20 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर किए जाने की मांग की है। सांसद ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इन दोनों गंभीर मामलों में संबंधित मंत्रालयों एवं एजेंसियों को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए जाएं, ताकि संस्थागत संपत्तियों की सुरक्षा हो सके।