सारनाथ को विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी, UNESCO में भारत के प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने परखी व्यवस्थाएं
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने सारनाथ की व्यवस्थाओं का आकलन किया। ...और पढ़ें

यूनेस्को में भारत के प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने परखी व्यवस्थाएं।

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ की व्यवस्थाओं का आकलन करने यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि/राजदूत विशाल वी. शर्मा सोमवार को सारनाथ पहुंचे। उन्होंने पुरातत्व संग्रहालय और पुरातात्विक खंडहर परिसर का निरीक्षण कर स्मारकों की सुरक्षा, संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि सारनाथ को विश्वस्तरीय पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
विशाल वी. शर्मा ने पुरातत्व संग्रहालय, धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, अशोक लाट, प्राचीन मूलगंध कुटी विहार और फोटो गैलरी का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी के बाद सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना गौरव की बात है। भगवान बुद्ध ने यहीं से धम्मचक्र प्रवर्तन का संदेश पूरी दुनिया को दिया था। उन्होंने पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्मारकों की सुरक्षा और सुविधाओं को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने स्मारकों के पास प्रभावी बैरिकेडिंग और स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाने, हिंदी और अंग्रेजी में क्यूआर कोड स्थापित करने तथा प्रमुख विदेशी भाषाओं में इतिहास और तस्वीरों से जुड़ी छोटी पुस्तिका या पाकेट डायरी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उन्होंने पुरातात्विक खंडहर परिसर के मुख्य द्वार पर यूनेस्को विश्व धरोहर शिलापट्ट का लोकार्पण भी किया।
धमेख स्तूप पर पड़े काले धब्बों को देखकर उन्होंने संरक्षण और नियमित रखरखाव पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि यहां भगवान बुद्ध के जीवन और बौद्ध दर्शन पर आधारित लाइट एंड साउंड शो शुरू किया जाए तो सारनाथ की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी तथा पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
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पुरातात्विक परिसर की प्राचीन जल निकासी व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बताते हुए इसके बारे में जानकारी देने के लिए सूचना बोर्ड लगाने की बात कही। श्रद्धालुओं द्वारा धमेख स्तूप पर सिक्के फेंकने की प्रवृत्ति रोकने के लिए अलग दानपात्र रखने और कैंडिल स्थल पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाने का सुझाव दिया।
साथ ही धमेख स्तूप के चारों ओर बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर भी जोर दिया। महाविहार परिसर में कुछ देर रुकने के दौरान उन्होंने कहा कि सारनाथ केवल पुरातात्विक स्मारकों का स्थल नहीं, बल्कि ज्ञान और आध्यात्मिकता की भूमि है।
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से इसकी पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी, लेकिन इसके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक विरासत और आध्यात्मिक वातावरण का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
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