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    सात वर्ष बाद सोमवार के संयोग से और भी फलदायिनी होगी इस बार नागपंचमी, जान लें व‍िशेष पुण्‍य का मान

    By Shailesh AsthanaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Fri, 07 Aug 2026 04:31 PM (IST)

    इस बार नागपंचमी 17 अगस्त को सोमवार के संयोग से सात साल बाद आ रही है, जिससे यह और भी फलदायिनी मानी जा रही है। यह पर्व भगवान शिव के प्रिय दिन पर नाग पूज ...और पढ़ें

    सात साल बाद सोमवार को नागपंचमी वाराणसी में विशेष फलदायी।

    सात साल बाद सोमवार को नागपंचमी वाराणसी में विशेष फलदायी।

    HighLights

    1. नागपंचमी 17 अगस्त को सोमवार के शुभ संयोग में।

    2. सात साल बाद आया यह विशेष फलदायी योग।

    3. नाग पूजा के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। सात साल के बाद सोमवार के संयोग से इस बार और भी फलदायिनी नागपंचमी होने जा रही है। प्रकृति में संतुलन और जीवन-शक्ति के संवर्धन के लिए भारतीय संस्कृति में नाग पूजा का पर्व नागपंचमी इस बार 17 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी। भगवान शिव के गले का हार नागों के पूजन का यह शास्त्रीय पर्व भगवान शिव के प्रिय दिवस सोमवार को पड़ने से इस बार और भी फलदायी माना जा रहा है।

    काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि आसन्न श्रावण शुक्ल पंचमी का आरंभ इस बार 16 अगस्त को सायं 6:33 बजे से होगा जो 17 अगस्त की सायं 6:31 तक रहेगी। 17 अगस्त को मध्याह्न व्यापिनी पंचमी होने के कारण नाग पंचमी उसी दिन मनाई जाएगी।

    ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रानुसार नाग पूजन का मुख्य काल (मुहूर्त) मध्याह्न काल होता है जो इस वर्ष सोमवार के संयोग से और भी विशिष्ट फलों को देने वाला है।

    ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वर्ष 2026 से पहले सोमवार के दिन नाग पंचमी 5 अगस्त 2019 को पड़ी थी। उस दिन सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि होने के साथ-साथ सावन का तीसरा सोमवार भी था।

    इस बार नागपंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाता है। नागों की पूजा से हम न केवल अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देते हैं।

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    नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से नाग देवता की पूजा करते हैं। इस दिन लोग अपने घरों में नाग की आकृति बनाते हैं और उन्हें दूध, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करते हैं। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और उसके संरक्षण के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।