Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    अजनाला के बलिदानियों की कथा पढ़ तमिलनाडु से परिवार पहुंचा BHU, DNA टेस्ट के लिए दिया सैंपल

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 09:16 AM (IST)

    तमिलनाडु के संथूर गांव से एक परिवार अजनाला के बलिदानियों से अपने संबंध की पुष्टि के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय पहुंचा और डीएनए सैंपल दिया। यह परिवार ...और पढ़ें

    अपना डीएनए सैंपल देने के लिए तमिलनाडु से आया परिवार। जागरण

    अपना डीएनए सैंपल देने के लिए तमिलनाडु से आया परिवार। जागरण

    HighLights

    1. तमिलनाडु के संथूर से परिवार ने दिया डीएनए सैंपल।

    2. अजनाला के 1857 के बलिदानियों से संबंध की पुष्टि।

    3. बीएचयू के प्रो. चौबे कर रहे हैं डीएनए विश्लेषण।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले के संथूर गांव से एक परिवार बुधवार को अचानक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग मेें प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे की प्रयोगशाला का पता पूछते पहुंच गया। अजनाला के बलिदानियों की कथा सुन उन्होंने उनके परिवार से अपने संबंधों की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण हेतु स्वेच्छा से सैंपल दिए।

    संथूर से यहां पहुंचे कार्तिकेश राजाराम तिवारी, उनकी पत्नी, साले और सलहज ने बताया कि पूर्वजों से सुना है कि उनका परिवार पीढ़ियों पूर्व उत्तर भारत से तमिलनाडु पहुंचा था। पूर्वज अपने साथ संस्कृति, भाषा, संस्कार और रीति-रिवाज भी लेकर गए जो आज भी संथूर और उसके तीन-चार किमी की परिधि में बसे आधा दर्जन गांवों से अधिक ब्राह्मण परिवारों में सुरक्षित हैं लेकिन क्यों और कहां से, यह नहीं मालूम। शायद वे अजनाला के बलिदानियों के परिवार हों।

    अब अजनाला की कहानी...
    एक अगस्त 1857 को अजनाला (पंजाब) के कालियांवाला कुएं में ब्रिटिश सेना ने 26वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के विद्रोही सिपाहियों को निर्ममता से पत्थर की गोलियां मारकर उनके शवों को कुएं में फेंक दिए गए। 2012 में इतिहासकार सुरेंद्र कोचर के नेतृत्व मे खुदाई में कंकाल, गोलियां, एपालेट और ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्के मिले।

    77866014

    तमिलनाडु से आए परिवार के लोगों का सैंपल लेते बीएचयू के ज्ञान लैब के विज्ञानी। जागरण


     

     बीएचयू के डीएनए विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, बीरबल साहनी शोध संस्थान के डा. नीरज राय, डा. के थंगराजन और पंजाब विश्वविद्यालय के डा. जेएस सेहरावत ने कंकालों का डीएनए और स्टैबल आइसोटोप विश्लेषण किया तो पता चला वे गंगा के मैदान (उत्तर प्रदेश, बिहार आदि) के निवासी थे। फिर उनके स्वजनों की खोज शुरू हुई लेकिन ब्रिटिश औपनिवेशिक रिकार्ड्स से कोई ठोस मदद नहीं मिली।

    कनाडा के टोरंटो में रह रहे संथूर निवासी इं. समीर पांडेय ने यह कहानी समाचार पत्रों में पढ़ी तो प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे से संपर्क किया। बताया कि उन्होंने घर में बड़ों से सुना था कि उनके एक पूर्वज प्रकाश पांडेय अजनाला में बलिदान हुए थे। उन्होंने अपना डीएनए सैंपल भी भेजा।

    यह भी पढ़ें- नरेन्द्र मोदी कैबिनेट ने वाराणसी को बड़ी सौगात, पीएम के संसदीय क्षेत्र को दो एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी

    प्रो. चौबे ने जब मिलान किया तो वह एक बलिदानी के कंकाल से मैच कर गया। इससे प्रेरित हो मंगलवार को कार्तिकेश राजाराम तिवारी का परिवार भी यहां पहुंचा और डीएनए के लिए अपना सैंपल दिया। भावुक हो बोले, यदि डीएनए मिल गया तो वे पुरखों की मातृभूमि के दर्शन करेंगे, कुलदेवताओं की पूजा करेंगे।

    मैच हुआ डीएनए तो संथूर जाएगी विज्ञानियों की टीम
    प्रो. चौबे ने बताया कि यदि इस परिवार का भी डीएनए सैंपल मैच कर गया तो उनकी टीम संथूर जाकर आसपास के गांवों में अन्य लोगों का सैंपल लेगी। शायद 169 वर्ष बाद बलिदानियों के स्वजन उनके अस्थि अवशेष के दर्शन कर सकें।

    खबरें और भी