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थाईलैंड की राजकुमारी सिनिनाथ ने सारनाथ में किया बुद्ध पूजन, धमेख स्तूप की परिक्रमा की

Published: Wed, 28 Jan 2026 05:30 AM (IST)

थाईलैंड की राजकुमारी सिनिनाथ पिलास कल्यानी ने वाराणसी में महात्मा बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ का दौरा किया। उन्होंने ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। थाईलैंड की राजकुमारी लेफ्टिनेंट जनरल सिनिनाथ पिलास कल्यानी महात्मा बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली पहुंच कर भाव विभोर दिखीं। मंगलवार दोपहर 12.30 बजे बौद्ध गया से सड़क मार्ग से उनके वाहनों का काफिला सारनाथ पहुंचा।

थाई बौद्ध मंदिर विहार में प्रभारी भिक्षु मंगलिको व धम्म शिक्षण केंद्र प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बुद्ध वंदना के साथ स्वागत किया। अल्प विश्राम व भोजन के बाद लगभग तीन बजे उन्होंने थाई बौद्ध मंदिर में महात्मा बुद्ध की पूजा-अर्चना की।

इसके बाद राजकुमारी पुरातात्विक खंडहर परिसर पहुंचीं जहा धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के अवशेषों का अवलोकन किया। धमेख स्तूप के समक्ष बैठीं और कुशीनगर थाई बौद्ध मंदिर के प्रभारी भिक्षु फ्रोम्बाचिरा पोथीवोग ने पूजा कराई।

सारनाथ से राजकुमारी का काफिला राजघाट के लिए निकला। इस दौरान भिक्षु गुरु धम्मो, डा. धर्म रश्मि, भिक्षु रत्नाकर, भिक्षु अस्सजी सहित दर्जनों बौद्ध भिक्षुओं ने स्वागत किया।

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नमो घाट पहुंचने पर राजकुमारी जलयान पर सवार हुईं। उससे ही गंगा के घाटों की छटा देखी। उनके बारे में जाना-समझा। संत रविदास घाट पहुंचने पर वाहन पर सवार हुईं और होटल ताज पहुंची जहां रात्रि विश्राम किया। इस दौरान उन्हें थाई फूड के साथ ही विशेष रूप से बनाए गए बनारसी व्यंजन भी परोसे गए जिसका उन्होंने स्वाद लिया और सराहा।

सारनाथ में हाइड्रोलिक जाम फंसी राजकुमारी की गाड़ी

सारनाथ के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अव्यवस्था से पीछा नहीं छूटा है। थाई मेहमान के आगमन पर यह साफ दिखा और अधिकारी मुंह छिपाते दिखे।

हुआ यह कि राजकुमारी जब सायंकाल धमेख स्तूप की पूजा कर वापस लौटीं और फिर उनके काफिले के वाहन राजघाट के लिए निकलने लगे। इस बीच हाइड्रोलिक बैरिकेडिंग जाम हो गई जो खोले न खुली।

लगभग 45 मिनट इंतजार के बाद राजकुमारी गाड़ी से उतरीं और पैदल 250 मीटर चल कर थाई बौद्ध मंदिर पहुचीं। बाद में कंस्ट्रक्शन के सुपरवाइजर ने हाइड्रोलिक सिस्टम पर कुछ युवकों को पर खड़ा करा कर बैरिकेड खोला।

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