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बनारसी साड़ी की तरह बनारस को खूबसूरत मानने वाली आशा भोसले के सुरों से सजा था जान्‍हवी का तट

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 12 Apr 2026 01:10 PM (GMT+05:30)

आशा भोसले के निधन के बाद काशी उनकी 2017 की यादगार यात्रा को याद कर रही है। उस दौरान उन्होंने ...और पढ़ें

आशा भोसले की काशी यात्रा: जब गंगा तट पर गूंजे उनके सुर, बनारस को बताया था खूबसूरत।

आशा भोसले की काशी यात्रा: जब गंगा तट पर गूंजे उनके सुर, बनारस को बताया था खूबसूरत।

HighLights

  1. आशा भोंसले ने 2017 में काशी का यादगार दौरा किया।

  2. 'सुर गंगा' महोत्सव में गिरिजा देवी संग दी थी प्रस्तुति।

  3. बनारस को बनारसी साड़ी सा खूबसूरत बताया, शिव भक्त थीं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। आशा भोसले के निधन के बाद काशी उनकी स्मृतियों को याद कर रही है। लगभग नौ वर्ष पूर्व, अप्रैल 2017 में, आशा भोंसले काशी आई थीं। यहां उन्होंने न केवल बनारसी साड़ी की खरीदारी की, बल्कि एक आयोजन में भी भाग लेकर काशी से अपने संबंध को और मजबूत किया था।

23 अप्रैल 2017 की रात, गंगा तट पर संगीत जगत की दो महान विभूतियों का मिलन हुआ था। एक ओर गि‍र‍िजा देवी यानी अप्पाजी थीं और दूसरी ओर आशा ताई यानी आशा भोंसले, दोनों ही सुर साम्राज्ञी। हजारों काशीवासियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पहली बार काशी आईं आशा भोंसले ने अपने कुछ लोकप्रिय गानों के मुखड़े सुनाकर श्रोताओं के दिलों में अपनी छाप छोड़ी।

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यूनेस्को के सहयोग से नगर निगम और पहल संस्था द्वारा भैंसासुर घाट पर आयोजित संगीत महोत्सव 'सुर गंगा' में रात लगभग नौ बजे आशा भोंसले मंच पर पहुंचीं। अपने सम्मान से अभिभूत होकर उन्होंने 'प्रेम में तोहरे ऐसी पड़ी मैं, पुराना जमाना नया हो गया, ये क्या हो गया' गाकर श्रोताओं की मुराद पूरी की।

इसके बाद उन्होंने 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नजर नहीं चुराना सनम' गाया। श्रोताओं ने फिर से गाने की मांग की, जिस पर आशा ताई ने कहा कि उनका गला खराब है। इस पर मंच पर मौजूद अभिनेता अन्नू कपूर ने कहा, 'नहीं दीदी, आपका गला बिल्कुल ठीक है।' इसके बाद आशा ने 'झुमका गिरा रे बरेली के बजार में' की कुछ पंक्तियाँ सुनाईं।

जब आशा भोसले भजन 'शंकर भंडारी भोले, मस्तक पर चंद्र सोए' गाकर माइक लौटाने लगीं, तब अन्नू कपूर ने उनके लोकप्रिय गीत 'पिया तू' की याद दिलाई। जैसे ही आशा ताई ने 'पिया तू अब तो आजा, शोला सा मन बहके आके बुझा जा' गाया, अन्नू 'मोनिका ओ माई डार्लिंग' कहकर ठुमकने लगे।

इस शानदार प्रस्तुति के बाद पद्मविभूषण गिरिजा देवी ने भी सुर गंगा के इस मंच को अपने सुरों से सजाया। आशा भोंसले ने कहा कि पहली बार काशी आकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उन्हें यहां बरसों पहले आना चाहिए था। 84 वर्ष की उम्र में काशी आकर उन्हें यह बात कचोट रही थी कि अब बहुत देर हो गई।

गंगा घाट पर उपस्थित प्रशंसकों से मुखातिब होकर आशा ने कहा था कि बनारस, बनारसी साड़ी की तरह सुंदर है। उन्होंने 'हर-हर महादेव' और 'भोलेनाथ की जय' का उद्घोष करके लोगों का दिल जीत लिया। मंच पर आकर श्रोताओं का अभिनंदन स्वीकार किया और कहा, 'आपके अथाह प्यार पर मैं नि:शब्द हो गई, क्या बोलूं।' आशा ने यह भी बताया था कि वह भगवान शिव की भक्त हैं और अब तक 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हैं। प्रशंसकों की गुहार पर उन्होंने चार चुनिंदा गाने गाकर लोगों का दिल जीत लिया।

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