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    Budget 2026: वाराणसी बनेगा मेडिकल हब, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 02:00 AM (IST)

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी है, जिसके लिए ₹1,06,530.42 करोड़ आवंटित किए गए। यह आवंट ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. स्वास्थ्य मंत्रालय को ₹1,06,530.42 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन।

    2. पीएम-एबीएचआईएम, पीएमएसएसवाई से स्वास्थ्य अवसंरचना मजबूत होगी।

    3. कैंसर, शुगर की दवाएं सस्ती, मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का यूनियन बजट पेश करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।

    इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के अध्यक्ष डा. अनुराग टंडन ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए कुल 1,06,530.42 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो संशोधित अनुमानों (आरई 2025-26) से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। इससे बनारस को मेडिकल हब बनाने में और अधिक आसानी होगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य बजट में 194 प्रतिशत से अधिक की संचयी वृद्धि दर्ज की गई है, जो ‘स्वास्थ्य सबके लिए’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है। बजट में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के लिए आवंटन में 67.66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर 4,770 करोड़ रुपये किया गया है।

    इससे क्रिटिकल केयर ब्लाक, पब्लिक हेल्थ लैब और अस्पतालों के विकास को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत 11,307 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल से 407 करोड़ (3.73प्रतिशत) अधिक है।

    इससे नए एम्स की स्थापना, मौजूदा संस्थानों का संचालन और सरकारी मेडिकल कालेजों का उन्नयन संभव होगा। खास बात यह भी है कि कैंसर की 17 दवाओं और शुगर की दवाएं सस्ता करने का निर्णय लाखों मरीजों के लिए बड़ी राहत है।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिली प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के लिए 3,477 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 30.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं को मजबूत करने पर फोकस रहेगा। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) और आईसीएमआर के लिए 4,821 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है, जिसमें 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एक नई राष्ट्रीय पहल ''बायो फार्मा शक्ति'' के तहत 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो बायोलाजिक्स, बायोसिमिलर और फार्मा रिसर्च को बढ़ावा देगा। सीडीएससीओ की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाकर दवा नियमन को मजबूत किया जाएगा।

    - डा. अरुण कुमार त्रिपाठी, सचिव, आइएमए बनारस शाखा।

    नए बजट से कैंसर एवं दुर्लभ रोगों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में कमी से इलाज सस्ता होगा और मरीजों का आउट-आफ-पाकेट खर्च घटेगा। हर जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर स्थापित को 24 घंटे इमरजेंसी केयर सुनिश्चित की जाएगी। संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपी) के लिए पहली बार 1,000 करोड़ रुपये अलग से दिए गए हैं। अगले पांच वर्षों में एक लाख नए एएचपी जोड़े जाएंगे। 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी।
    डा. बृजेश कुमार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, मंडलीय चिकित्सालय कबीरचौरा

    पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब्स बनाकर मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 39,390 करोड़ और आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के लिए 9,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वाराणसी जैसे शहरों में भी इन योजनाओं से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट स्वास्थ्य अवसंरचना, अनुसंधान और सुलभ इलाज की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जो विकसित भारत@2047
    के लक्ष्य को साकार करेगा।
    डा. एनडी शर्मा, अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण वाराणसी मंडल।

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