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    2022 में शुभम ने छह दवा कारोबारियों के साथ मिलकर रखी तस्करी की नींव, तीन साल में बनाया 2000 करोड़ का साम्राज्य

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 08:13 AM (IST)

    वाराणसी में 2022 में शुभम जायसवाल ने छह दवा कारोबारियों के साथ मिलकर कफ सीरप तस्करी की नींव रखी। शुरुआत में 500 शीशियां बिकती थीं, जो बाद में लाखों तक ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. शुभम जायसवाल ने 2022 में वाराणसी में तस्करी शुरू की।

    2. बोगस फर्मों से 2000 करोड़ का साम्राज्य फैलाया गया।

    3. नेपाल सीमा से गिरफ्तारियों ने कई राज खोले।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। कफ सीरप तस्करी की नींव चार साल पूर्व वर्ष 2022 में वाराणसी में रखी गई थी। उस समय 500 शीशियां बमुश्किल रोजाना बिक पा रही थीं। इसके बाद प्रह्लादघाट के कायस्थान मुहल्ला के शुभम जायसवाल ने कफ सीरप के गैर चिकित्सकीय उपयोग की रणनीति बनाते छह साथियों संग तस्करी की नींव रखी, जिसके बाद कफ सीरप की बिक्री लाख के पार पहुंचने लगी।

    डिमांड और आपूर्ति का अंतर पाटने को बोगस फर्मों को खोलने का दौर शुरू हुआ तो गिरोह के सदस्य कई राज्यों में फैल गए और तस्करी का आर्थिक साम्राज्य दो हजार करोड़ के पार जा पहुंचा। नेपाल भागने के दौरान मंगलवार को सिद्धार्थनगर स्थित नेपाल बार्डर से पकड़े गए आकाश पाठक, विकास सिंह नरवे व अंकित श्रीवास्तव ने पुलिस के पास पहले से पड़ी कई अपुष्ट जानकारियों पर मुहर लगाई।

    कमिश्नरेट की एसआइटी ने तीनों आरोपितों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट के समक्ष एनडीपीएस की धारा में पेश किया तो सभी सलाखों के पीछे जा पहुंचे। पुलिस उपायुक्त गौरव बंसवाल ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई है। डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि सिद्धमाता लेन गोलघर मैदागिन निवासी आकाश पाठक ने स्वीकारा कि वर्ष 2022 में कफ सीरप की रोजाना बिक्री बिक्री 500 शीशी थी।

    दवा कारोबारी प्रशांत उपाध्याय, शिल्पी फार्मा के प्रतीक गुजराती, सिंडीकेट फार्मा के मनोज यादव, लोकेश फार्मा के धर्मेन्द्र अग्रवाल और मेरे संग (आकाश पाठक) शुभम जायसवाल ने कोडीनयुक्त कफ सीरप की बिक्री बढ़ाने के लिए भ्रष्टाचार की नींव रखी।

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    शुरुआती प्रयास में ही कफ सीरफ की शीशियां लाखों में बिकने लगीं तो शुभम के पिता भोला प्रसाद ने रांची में शैली ट्रेडर्स फर्म खोलकर दवा कंपनी से केंद्रीय डिस्ट्रीब्यूटरशिप का काम लिया, जिसके बाद कूटरचित दस्तावेज के जरिए बोगस फर्में बननी शुरू हो गईं।

    खबरें और भी

    आजमगढ़ के विकास सिंह नरवे व जौनपुर के ख्वाजा दोस्त निकट रामचित्र मंदिर निवासी अंकित श्रीवास्तव सरगना शुभम के साथ मिलकर कूट रचित दस्तावेजों से बने दवा फर्मों के जरिए फर्जी ई वे बिल, जीएसटी इनवाइस से कफ सीरप बंगाल, त्रिपुरा समेत देश में कई प्रांतों में भेजी जाने लगी।