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    जिन पौधों ने बनाया विश्व रिकॉर्ड… उनको चर गईं भैंसें, जमीनी हकीकत ने खड़े कर दिए सवाल

    Updated: Tue, 03 Mar 2026 06:53 PM (GMT+05:30)

    वाराणसी के डोमरी में 'शहरी वन' ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, लेकिन अगले ही दिन पौधों की सुरक्षा पर सवाल उठे। भैंसों द्वारा पौधों को नुकसान पहुँचाने औ ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. डोमरी शहरी वन ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

    2. रिकॉर्ड के बाद पौधों की सुरक्षा पर सवाल उठे।

    3. 'जीवामृत' और मियावाकी पद्धति से संरक्षण जारी।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। डोमरी का ‘शहरी वन’ रविवार को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में गूंजा। चीन के 2018 के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया।

    सेना, एनडीआरएफ, पुलिस और हजारों विद्यार्थियों की भागीदारी से यह अभियान ऐतिहासिक बताया गया था, लेकिन अगले दिन सोमवार को जमीनी हकीकत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थल निरीक्षण में बड़ी संख्या में पौधों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। कई हिस्सों में न तो मजबूत घेराबंदी है और न ही नियमित निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था।

    खुले में घूमती भैसें समेत पशु पौधों को नुकसान पहुंचाते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि देखरेख सख्त नहीं हुई तो लाखों पौधों का दावा कागजों तक सिमट सकता है।

    सबसे गंभीर पहलू यह है कि डोमरी क्षेत्र गंगा तट के समीप स्थित है, जहां जून से अगस्त के बीच बाढ़ की स्थिति सामान्य बात है। यदि पौधे जलभराव में नष्ट होते हैं तो यह सरकारी संसाधनों की सीधी क्षति मानी जाएगी। डोमरी का ‘मिनी काशी’ सचमुच हरा-भरा बने, इसके लिए प्रशासन को अब रिकॉर्ड से आगे बढ़कर परिणामों की रक्षा करनी होगी।

    डोमरी में हर महीने होगा 35 हजार लीटर 'जीवामृत' का छिड़काव

    डाेमरी में लगाए गए ढाई लाख पौधों को जीवित रखने और उन्हें जंगल की शक्ल देने के लिए जमीन की उर्वरता पर विशेष काम किया जा रहा है। मिट्टी रिपेयरिंग के अभियान क्रम में चार फीट गहरी खुदाई कर 100 टन कोकोपीट और 250 टन गाय के गोबर की खाद का वैज्ञानिक मिश्रण तैयार किया गया है। यानी पौधों को नैसर्गिक खाद देने के लिए हर महीने 35,000 लीटर 'जीवामृत' का छिड़काव किया जा रहा है।

    मियावाकी विशेषज्ञ विशाल श्रीवास्तव बताते हैं कि यह प्रक्रिया पहले छह महीने तक निरंतर चलेगी और अगले दो वर्षों तक अंतराल पर जारी रहेगी। सिंचाई के मोर्चे पर इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह वाटर प्रूफ बनाया गया है। गर्मियों में पानी की किल्लत से निपटने के लिए परिसर में ही चार विशेष तालाब खोदे जाएंगे।

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    विशेषज्ञ बताते हैं कि मियावाकी एक प्रमाणित और सफल पद्धति है। पर्याप्त शोध पत्र इसके परिणामों की पुष्टि करते हैं। हम यहां केवल पेड़ नहीं लगा रहे, बल्कि एक ऐसा ईकोसिस्टम बना रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा का स्रोत बनेगा।

    डोमरी के पौधों की सुरक्षा का पूरी तरह से ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पांच सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मी तैनात करने के लिए वार्ता की जा रही है। पर्यावरण सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं की जाएगी।

    -अशोक तिवारी, महापौर