शिव-शक्ति मिलन व रंग पर्वों से बना फाल्गुन का महीना खास, 2 फरवरी से आरंभ होकर तीन मार्च तक चलेगी मस्ती
वाराणसी में फाल्गुन मास 2 फरवरी से 3 मार्च तक 26 व्रत-पर्वों के साथ मनाया जाएगा। इसमें महाशिवरात्रि (15 फरवरी) ...और पढ़ें

वसंत पंचमी पर ठाकुर बांकेबिहारीजी ने की ब्रज में होली की शुरुआत l जागरण आर्काइव
HighLights
फाल्गुन मास 2 फरवरी से 3 मार्च तक चलेगा।
महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को।
चंद्रग्रहण से होली एक दिन बाद 4 मार्च को।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। हर पल मस्ती, हर दिन उल्लास, गीत-गवनई रंग, अबीर गुलाल, पतझड़ उल्लास, प्रेम, सद्भाव की मंजूषा लिए विक्रम संवत 2082 का अंतिम महीना फाल्गुन दस्तक देने को तैयार है। यह महीना दो फरवरी से आरंभ हो जाएगा। इस बार यह महीना पूरे 30 दिन का होगा और तीन मार्च तक रहेगा।
इन 30 दिनों में सनातन धर्मावलंबी आदिशक्ति व शिव के महामिलन का पर्व महाशिवरात्रि, उनके द्विरागमन का पर्व रंगभरी एकादशी, बुराई पर अच्छाई और राक्षसवृत्ति पर देवभक्ति की विजय का पर्व होली सहित कुल 26 व्रत-पर्व उल्लास पूर्वक मनाएंगे और रंगों से लेकर अबीर, गुलाल, भंग की तरंग और गुझिया की मस्ती में खो जाएंगे।
फागुन महीने में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को भगवान शिव के विवाहोत्सव के उल्लास का साक्षी बनेगा तो रंगभरी एकादशी का पर्व 27 फरवरी मां गौरा के द्विरागमन के साथ भक्त बाबा विश्वनाथ व मां गौरा को गुलाल लगा उनसे होली खेलने और चार दिवसीय रंग पर्व मनाने की अनुमति लेंगे।
इसी बीच काशी में होने वाली चिता भस्म की होली भी खास होगी। शिव विवाह पर निकलने वाली बरात दुनिया के आकर्षण का केंद्र होगी तो चिता भस्म की होली देखने देशी-विदेशी सभी पहुंचेंगे। इन सबके साथ बढ़ते वासंतिक उल्लास की परिणिति वर्ष के अंतिम पर्व होली तक जाएगी।
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होलिका दहन और होली में दूरी बढ़ाएगा उतरते पूर्णिमा का चंद्रग्रहण
हालांकि फाल्गुन महीने के अंतिम दिवस फाल्गुन पूर्णिमा यानी तीन मार्च को ग्रस्तोदय खग्रास चंदग्रहण होगा। भारत में यह चंद्रग्रहण लगा हुआ ही उदित होगा। इसके सूतक के प्रभाव होलिका दहन और रंगोत्सव के बीच एक दिन की दूरी बढ़ जाएगी। यानी होलिका दहन तो दो मार्च को किया जाएगा तो अगले ही दिन होने वाला रंगोत्सव इस बार तीन को न होकर चार मार्च को मनाया जाएगा।

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