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    वाराणसी में बनेगा 13 मंजिला बनेगा महिला हॉस्टल, जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:19 PM (IST)

    वाराणसी में कामकाजी महिलाओं के लिए 500 बेड का 13 मंजिला छात्रावास बनेगा। इसके लिए जमीन हस्तांतरण और डीपीआर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिससे महिलाओ ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. वाराणसी में 500 बेड का 13 मंजिला महिला छात्रावास।

    2. रामनगर में जमीन हस्तांतरित, डीपीआर अंतिम चरण में।

    3. कामकाजी महिलाओं को किफायती आवास, सुरक्षा और सुविधा।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। 21 जुलाई को 500 बेड के कामकाजी महिलाओं के छात्रावास को हरी झंडी मिल गई। पांच दिन के अंदर ही निर्माण प्रक्रिया की शुरुआत के सभी मानक भी पूरे होने के कगार पर हैं। रामनगर के साहित्यनाका में छह हजार वर्ग मीटर जमीन राजस्व विभाग के पास है जो प्रोबेशन विभाग को हस्तांतरित हो गई। कार्यदायी संस्था भी नामित हो गई है और डीपीआर की प्रक्रिया अंतिम दौर में है।

    मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना और त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत सीएम ने छात्रावास की घोषणा की। विभिन्न सेक्टरों में कार्यरत कामकाजी महिलाओं को राहत होगी। छात्रावास आठ मंजिला बनेगा जिसे बाद में 13 मंजिल तक बढ़ाने की तैयारी है।

    छात्रावास से शहर में आने जाने के लिए बस सेवा भी शुरू हो सकती है। जमीन हस्तांतरित होने के बाद कार्यदायी एजेंसी राजकीय निर्माण निगम डीपीआर (डिटेल प्राेजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करेगा। फाइल वित्त विभाग जाएगी। वहां से धन आवंटित होते ही कार्य भी शुरू हो जाएगा।

    खर्च होगी 47 करोड़ से ज्यादा की धनराशि

    प्रति भवन की लागत 47.75 करोड़ है। इस योजना में कुल 334.25 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके लिए 170 करोड़ का बजट भी आवंटित हो चुका है। व्यय वित्त समिति ने भी छात्रावास निर्माण के लिए अपना अनुमोदन दे दिया है।

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    पीजी में 8-12 हजार प्रतिमाह खर्च करती हैं कामकाजी महिलाएं

    शहर में 300 के करीब महिला पीजी या निजी स्तर के महिला छात्रावास संचालित हैं। कामकाजी महिलाएं निजी क्षेत्र के पीजी में प्रतिमाह आठ से 12 हजार रुपये का भुगतान करती हैं। सरकारी छात्रावास बनने के बाद उनके खर्चे में कमी की संभावना है।

    महिला छात्रावास के लिए राजस्व विभाग ने नाप ली है जमीन

    महिलाओं के हास्टल निर्माण के लिए लेखपाल व महिला कल्याण विभाग की टीम ने शनिवार को ही डबल पानी टंकी के समीप जमीन की नापी पूरी कर लिया। अब आगे की प्रक्रिया गति पकड़ चुका है। कुल 6000 वर्ग मीटर में से दो हजार वर्ग मीटर में आठ मंजिला हास्टल बनेगा। बाद में इसका तल बढाकर 13 मंजिला होगा। निर्माण 18 महीनों में पूरा करना होगा।

    मिनी पार्क, मंदिर, मनोरंजन के साधन के अलावा शिशु गृह, जिम सेंटर, आडिटोरियम और कैंटीन भी होगा। नापी के दौरान महिला कल्याण विभाग के निदेशक आशीष कुमार झा, लेखपाल आशीष शर्मा, अंशु कुमार शाही मौजूद रहे।

    महिला छात्रावास बनने से काफी राहत होगी। सबसे बड़ा महिलाओं की सुरक्षा का होगा। उन्हें एक ही छत के नीचे सारी सुविधा मिल जाएगी। -डॉ. रेशमा मिर्जा एसोसिएट प्रोफेसर।

    सरकार का प्रयास सराहनीय है। अभी तक महिलाओं के लिए इस तरह की योजना नहीं चली थी। यह सरकार के दूरगामी सोच का प्रमाण है। -अंजलि कुमारी, रामनगर।

    तमाम महिलाएं कम सैलरी में कार्य करती हैं। निजी पीजी में उन्हें ज्यादा पैसा देना होता है। छात्रावास बनने के बाद उन्हें आर्थिक दिक्कत नहीं होगी। -मनसा गुप्ता, रामनगर।

    नौकरी पेशा महिलाओं को काफी सहूलियत हो जाएगी। एक ही छत के नीचे उन्हें सुरक्षा के साथ सारी सुविधाएं मिल जाएंगी।सरकार की यह अच्छी सोच है। -जया कुमारी, सहायक अध्यापिका।

    साहित्यनाका में जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। डीपीआर तैयार हो रहा है। धन मिलते ही राजकीय निर्माण निगम कार्य शुरू कर देगा। इसकी मॉनीटरिंग विभागीय स्तर से की जाएगी। -पंकज कुमार मिश्र, जिला प्रोबेशन अधिकारी।

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