वाराणसी में चार वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म करने वाले चाचा को 20 साल की सजा, जुर्माना न देने पर बढ़ेगा समय
वाराणसी में चार वर्षीय भतीजी से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने आरोपित चाचा को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को 20 साल के कठोर ...और पढ़ें

चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के दोषी चाचा को 20 साल की कड़ी कैद।
HighLights
चार वर्षीय भतीजी से दुष्कर्म मामले में चाचा दोषी करार।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने सुनाई 20 साल की सजा।
दोषी पर 40 हजार रुपये जुर्माना, आधी राशि पीड़िता को।
विधि संवाददाता, वाराणसी। घर में खेल रही चार वर्षीय मासूम भतीजी को टॉफी दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर सुनसान में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय ने आरोपित चाचा किशोर अपचारी को दोषी करार दिया।
अदालत ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्त द्वारा जुर्माना न देने पर उसे एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अभियुक्त द्वारा जुर्माना देने पर अदालत ने बतौर क्षतिपूर्ति आधी धनराशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि चार वर्षीय मासूम बच्ची 26 मार्च 2021 को अपने घर में खेल रही थी। दोपहर डेढ़ बजे रिश्ते का चाचा टाफी दिलाने का लालच देकर बच्ची को झाड़ीनुमा खंडहर में ले जाकर दुष्कर्म किया। लहूलुहान बच्ची रोते हुए घर लौटी।
जब स्वजन ने उससे रोने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके पेट में दर्द हो रहा है, चाचा ने उसे मारा है। बच्ची को उसके पिता ने चुप कराया। नहलाने के लिए उसकी मां ले गई तो देखा कि उसके कपड़े (पैंट) में खून लगा है और गुप्तांग से खून निकल रहा था।
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यह देख जब उसकी मां ने पुनः पूछा कि ये किसने किया तो उसने बताया कि चाचा ने पता नहीं उसके साथ क्या किया है। जब खून रुकना बंद नहीं हुआ तो स्वजन ने पांडेयपुर पुलिस चौकी पर शिकायत दर्ज कराई। मासूम का इलाज कराने पुलिस उसे कबीर चौरा मंडलीय अस्पताल लेकर पहुंची जहां से उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया। बाद में पुलिस ने छह अप्रैल 2021 को राजकीय जिला महिला चिकित्सालय में पीड़िता का मेडिकल जांच और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया।
घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने किशोर अपचारी चाचा को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया। आरोपित के खिलाफ बाल न्यायालय में मुकदमा की सुनवाई आरंभ हुई। जब आरोपित बालिग घोषित कर दिया गया तो मुकदमे को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) में स्थानांतरित कर दी गई।
घटना के समय आरोपित की उम्र 16 वर्ष सात माह थी। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयान और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपित को दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे दंडित किया।
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