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    मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर बच्चों से ठगी, जादूगर पर कार्रवाई की तैयारी

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 05:27 PM (IST)

    एक जादूगर मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर स्कूली बच्चों से 10 रुपये प्रति छात्र वसूल रहा है, जिसके लिए उसने सीईओ कार्यालय का फर्जी दस्तावेज बनाया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. जादूगर मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर बच्चों से पैसे वसूल रहा।

    2. सीईओ कार्यालय का फर्जी दस्तावेज बनाकर कर रहा है ठगी।

    3. शिक्षा विभाग ने जादूगर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की।

    जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर स्कूली बच्चों से धनराशि वसूलने के मामले में कथित जादूगर ने शिक्षा महकमे में हलचल मचा दी है।

    मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय का फर्जी दस्तावेज बना जादूगर जागरुकता के नाम प्रति छात्र 10 रुपये अंशदान लेने और उसका 30 प्रतिशत मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करा रहा है।

    शिक्षा विभाग ने अब स्पष्ट किया है कि शुल्क लेने संबंधी पत्र फर्जी है और इस मामले में संबंधित कथित जादूगर के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    सीईओ कार्यालय की ओर से बीते 16 मई को जारी एक पत्र में हरियाणा निवासी महेश शर्मा को सरकारी, अशासकीय, निजी मान्यता प्राप्त तथा सीबीएसई-आईसीएसई विद्यालयों में वैज्ञानिक मैजिक शो एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई थी।

    पत्र में साफ शर्त रखी गई थी कि जल संरक्षण, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता, अंधविश्वास उन्मूलन सहित विभिन्न विषयों पर होने वाले सभी कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क होंगे और विद्यार्थियों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जादूगर ने इसी दस्तावेज का एआइ के जरिए दूसरा फर्जी पत्र बनाया है, जिसके जरिए वह स्कूलों में जा रहा है, जिसमें प्रत्येक छात्र से 10 रुपये अंशदान लेने तथा एकत्र धनराशि का 30 प्रतिशत मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का दावा कर रहा है। पूर्व में भी शिकायतें आई हैं। अब शिक्षा विभाग कथित जादूगर पर कार्रवाई करने जा रहा है।

    सीईओ कार्यालय ने निःशुल्क जागरूकता कार्यक्रमों की अनुमति दी थी। यदि मुख्यमंत्री राहत कोष का नाम लेकर विद्यालयों या विद्यार्थियों से धनराशि वसूली गई है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्र पूरी तरह से फर्जी है।

    -चंदन सिंह बिष्ट, सीइओ, शिक्षा विभाग

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